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किसी व्यक्ति को रेप की कोशिश ठहराने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं, ठोस सबूत होने चाहिए – पटना HC
Patna: पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को रेप कोशिश करने को दोषी ठहराते केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं है,बल्कि ऐसे ठोस सबूत होने चाहिए. जस्टिस संदीप कुमार ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि रेप की कोशिश करना और अश्लील आपत्तिजनक हरकतों के बीच अन्तर जरूरी है. कोर्ट ने इसे लज्जा भंग का मामला माना है.
ये मामला बेगूसराय जिले से सम्बन्धित है. इसमें8फरवरी,2010को एक विधवा महिला जब अपने बच्चे के साथ घर में सोई थी. आरोप है कि एक अधेड पडोसी उस पर गंदी नजर रखता था. उस दिन रात के दस बजे वह उसके घर में जबरदस्ती घुस कर दीया बुझा दिया और उसके उपर लेट गया.
वह महिला जब चिल्लाने लगी,तो गांव के लोग आ गये. उन्होंने उस अधेड की पिटाई कर दी. गांव वालों ने आश्वासन दिया कि पंचायती में इस मामले को ले जाया जायेगा. लेकिन वह व्यक्ति पंचायती में नहीं आया. इसके बाद वह महिला संबंधित पुलिस स्टेशन एफआईआर दर्ज कराने गयी,पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं किया.
उसके बाद वह सीजेएम कोर्ट में घटना के दो दिन बाद गई. कोर्ट ने शिकायत को सीआरपीसी की धारा156 (3) के तहत पुलिस के पास भेजा,जिसके बाद बलिया पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ. पुलिस ने जांच के बाद रेप की कोशिश के आरोप में चार्जशीट दायर किया. आईपीसी की धारा376के साथ धारा511( रेप की कोशिश) और धारा448के तहत आरोप तय किया.
ट्रायल कोर्ट ने रेप की कोशिश के लिए चार साल सश्रम कारावास और घर में जबरन घुसने के लिए छः माह की सश्रम कारावास की सजा सुनाई. इस आदेश को याचिका दायर कर चुनौती दी गई.
जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को रेप की कोशिश ठहराने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं है. इसके लिए ठोस सबूत होने चाहिए.
कोर्ट ने माना कि घर में आरोपी की मौजूदगी साबित हुआ है. महिला ने आरोपी को अपने घर में देखने,उसकी हरकतों के बारे में स्पष्ट और लगातार बयान दिया है. आरोपी उसी गांव का था और उसे वह पहचानती है. उसके शोर मचाने पर गांव वालों ने आरोपी को पकड़ लिया. कोर्ट ने पडोसी की गवाही को महत्वपूर्ण माना.
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी के घटनास्थल पर मौजूदगी को लेकर पडोसियों से बहस नहीं की गई. ये भी नहीं कहा गया कि महिला या पडोसी से दुश्मनी के कारण झूठे मामले में फंसाया गया. आरोपी ने भी दस बजे रात में घर के अंदर होने का स्पष्टीकरण नहीं दिया. इसलिए कोर्ट ने माना कि घटना के समय आरोपी की घर में मौजूदगी साबित होती है.
आरोपी के अधिवक्ता की ओर से एफआईआर दर्ज कराने में हुई विलम्ब का मुद्दा लाया गया. कोर्ट ने इसे यह कह कर नकार दिया कि सामाजिक परिस्थिति,महिलाएं ऐसे मामलों में संकोच,शर्म, लज्जा करना देरी का कारण हो सकता है.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी की गवाही कोई जरूरत नहीं है,यदि उपलब्ध गवाहों की विश्वसनीय गवाही से जरुरी तथ्य साबित हो रहे हो,तो अतिरिक्त गवाह को प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हो,तो उसी के बयान पर सजा सुनाई जा सकती है.
कोर्ट ने महिला की गवाही के मुख्य हिस्से को स्वीकार किया. कोर्ट ने ये भी ध्यान दिया कि प्रारम्भ में रेप का आरोप था,जबकि पुलिस ने रेप की कोशिश के मामले में चार्जशीट दायर किया था. कोर्ट ने कहा कि रेप की कोशिश करना और अश्लील आपत्तिजनक हरकत के बीच में अंतर होता है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल तैयारी करना और अपराध को अंजाम देने का कार्य करना अलग-अलग स्थिति है. हाईकोर्ट ने महिला और पडोसियों की गवाही आरोपी की मौजूदगी साबित करने के लिए पर्याप्त है. जांच अधिकारी की गवाही नहीं होने के कारण आरोपी को कोई नुकसान नहीं हुआ, जो कि आरोपी के मौजूदगी के सबूत को कमजोर कर दे.
कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हैं,तो उसके बयान पर सजा सुनाई जा सकती है. कोर्ट ने महिला के गवाही मुख्य हिस्से स्वीकार किए, जैसे आरोपी का घर में जबरन घुसने,दीया बुझाना,उसके उपर लेटना,उसका मुंह बंद करना आदि.
लेकिन रेप की कोशिश के लिए जरुरी कार्रवाई के बारे में महिला के बयान में एकरुपता नहीं थी. न ही दूसरे सबूतों से पुष्टि हुई. कोर्ट ने माना कि आरोपी हरकतें मर्यादा भंग करने वाली थी. हाईकोर्ट ने रेप करने की कोशिश की सजा रद्द कर दी,लेकिन घर में घुसने के मामले में अपराधी करार दिया.
कोर्ट ने दोनों अपराधों में सजा घटाकर अब तक जेल में बिताये गये अवधि कर दिया. साथ ही पच्चीस हज़ार का जुर्माना लगाया, जिसे मुआवजा के रूप में पीड़िता को दिया जाएगा.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
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