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झारखंड में परिसीमन पर सियासत तेज, आदिवासी सीटों के भविष्य को लेकर BJP-कांग्रेस आमने-सामने
रांची: झारखंड में परिसीमन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य में आदिवासी समुदाय के हितों और विधानसभा सीटों पर उनके प्रतिनिधित्व को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बीजेपी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदिवासियों के हितों को लेकर गंभीर हैं और परिसीमन पर विपक्ष बेवजह आशंकाएं फैला रहा है। वहीं, कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि अगर केंद्र सरकार की मंशा साफ है, तो परिसीमन से जुड़ी योजना का पूरा खाका सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
बीजेपी का दावा—आदिवासी हितों का रखा जाएगा ध्यान
परिसीमन को लेकर उठ रहे सवालों पर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा आदिवासी समुदाय के हितों को प्राथमिकता देते रहे हैं। बीजेपी के मुताबिक, परिसीमन और एसएआर से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
बीजेपी प्रवक्ता संदीप वर्मा ने कहा कि परिसीमन को लेकर विपक्ष जिस तरह की आशंकाएं जता रहा है, वैसा कुछ नहीं होने वाला है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में नियमों का पालन किया जाएगा और जो भी निर्णय होगा, वह न्यायसंगत होगा।
कांग्रेस ने उठाए सवाल,सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
दूसरी ओर, कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की विधानसभा सीटों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर संभावित असर को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने मांग की कि केंद्र सरकार परिसीमन से जुड़ी अपनी योजना सार्वजनिक करे और सभी राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक बुलाए। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि परिसीमन के बाद आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधित्व की स्थिति क्या होगी।
कांग्रेस ने सवाल किया कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट है, तो सभी दलों को विश्वास में लेकर योजना और उससे जुड़े प्रावधानों पर चर्चा क्यों नहीं की जा रही है?
आदिवासी प्रतिनिधित्व पर टिकी निगाहें
झारखंड में परिसीमन को लेकर जारी इस राजनीतिक बहस के बीच आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल प्रमुखता से उठ रहा है। कांग्रेस जहां संभावित बदलावों को लेकर आशंका जता रही है, वहीं बीजेपी इन आशंकाओं को खारिज करते हुए आदिवासी हितों की सुरक्षा का भरोसा दे रही है।
अब सवाल यह है कि परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सरकार कब और किस तरह स्थिति स्पष्ट करती है। क्या इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक होगी? क्या परिसीमन से जुड़ी योजना और नियमों को सार्वजनिक किया जाएगा? और सबसे अहम, झारखंड में आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही परिसीमन को लेकर उठ रही आशंकाओं और राजनीतिक दलों के दावों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल, इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस जारी है।
रांची से करिश्मा सिन्हा की रिपोर्ट
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