BIHAR NEWS
ग्रामीणों से सुनिए, कैसे पंचायत सरकार भवन से गांव में बदली सुविधाओं की तस्वीर?
नालंदा: “किसी भी राष्ट्र या राज्य की आत्मा गांवों में बसती है.”यह विचार महात्मा गांधी के उस प्रसिद्ध कथन की याद दिलाता है,जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में रहती है. जब तक हमारे गांवों का विकास नहीं होगा,तब तक देश या राज्य के वास्तविक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती. यही कारण है कि लोक कल्याणकारी सरकारों की अधिकांश प्रमुख और बुनियादी योजनाओं के केंद्र में ग्रामीण क्षेत्र और वहां रहने वाले लोग होते हैं.
इसी सोच के साथ बिहार सरकार राज्य की सभी पंचायतों में पंचायत सरकार भवन का निर्माण कर रही है. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विभिन्न सरकारी और बुनियादी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना है.
पंचायत सरकार भवन में जाति,आय,निवास और अन्य जरूरी प्रमाण-पत्र आसानी से बनवाने की सुविधा है. लोक सेवाओं के अधिकार से जुड़े कार्यों और आवेदनों का निपटारा भी यहीं किया जा रहा है. इसके अलावा आधार कार्ड से जुड़े नए नामांकन और सुधार की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है.
छात्रों और ग्रामीणों के लिए रीडिंग रूम और लाइब्रेरी की व्यवस्था है. वहीं,ग्राम पंचायत की बैठकों और विकास कार्यों की योजना बनाने के लिए सभा कक्ष की भी व्यवस्था है. इस तरह पंचायत सरकार भवन ग्रामीणों के लिए सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच का केंद्र बनने के साथ-साथ पंचायत स्तर पर विकास और प्रशासनिक कार्यों को भी अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. पंचायती राज विभाग के मुताबिक अभी तक 3,257 भवन का निर्माण किया गया है.
सुनिए ग्रामीणों की जुबानी
“पहले छोटे-छोटे कार्यों के लिए ग्रामीणों को जिला या प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था. अब पंचायत सरकार भवन और पंचायत स्तर पर उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं के कारण अनेक आवश्यक सेवाएं ग्रामीणों को उनकी अपनी ग्राम पंचायत में ही मिल रही हैं. सबसे आसान बुजुर्गों के लिए हुआ है. उन्हें काफी समस्या का सामना करना पड़ता था.”
शुभम कुमार,मुरौरा,नालंदा
“एक महिला होकर गांव से बाहर जाकर सरकारी कार्यालय जाना,फिर काम न होने की वजह से वापस आना और बार-बार जाना... काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. पंचायत सरकार भवन बनने से गांव की महिलाओं को काफी आसानी हुई है. यह सरकार की बहुत शानदार पहल है.”
समता देवी,चोरसुआ,नालंदा
“गांव में अधिकांश लोग बाहर कमाते हैं. ऐसे में महिलाओं के लिए बाहर जाना बहुत मुश्किल है. अब सरकारी काम के अलावा गांव के जनप्रतिनिधि और अधिकारी एक ही जगह मिल जाते हैं. सभी लोगों के लिए बहुत आसान हो गया है.”
कंचन कुमारी,चोरसुआ,नालंदा
वाकई, ग्राम पंचायत अब एक ‘मिनी ब्लॉक’ के रूप में उभर रही है, जहां योजनाओं की जानकारी, प्रमाण-पत्र, जनकल्याणकारी सेवाओं एवं अन्य आवश्यक कार्यों का लाभ स्थानीय स्तर पर आसानी से मिल रहा है.
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