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दीपावली-छठ से पहले बसों का किराया 50% तक बढ़ा, घर लौटने वाले यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ
रांची से पटना,कोलकाता,सिलीगुड़ी,भुवनेश्वर और वाराणसी समेत कई शहरों के लिए बढ़े बसों के किराए;त्योहारों में बढ़ती मांग के बीच मनमानी वसूली पर उठे सवाल
रांची: दीपावली और छठ महापर्व नजदीक आते ही दूसरे राज्यों में काम करने वाले झारखंड के लोगों का घर लौटना शुरू हो गया है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए घर पहुंचना चाहते हैं। लेकिन इस बार घर वापसी का सफर उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। हवाई किराए में बढ़ोतरी के बाद अब बसों के किराए में भी करीब 50 प्रतिशत तक इजाफा देखने को मिल रहा है।
रांची से बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों के विभिन्न शहरों के लिए चलने वाली बसों का किराया सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गया है। सबसे ज्यादा परेशानी मध्यमवर्गीय परिवारों और दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले लोगों को हो रही है, जो कम खर्च में अपने घर पहुंचने की उम्मीद रखते हैं।
कई रूटों पर बढ़े बसों के किराए
त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती भीड़ के बीच रांची से विभिन्न शहरों के बस किराए में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
रांची-पटना: पहले700से800रुपये,अब1200से1500रुपये तक
रांची-कोलकाता: पहले400से550रुपये,अब700से1600रुपये तक
रांची-सिलीगुड़ी: पहले करीब1200रुपये,अब2000रुपये तक
रांची-भुवनेश्वर: पहले700से800रुपये,अब1200से1500रुपये तक
रांची-रायपुर: पहले करीब1200रुपये,अब1700से1800रुपये तक
रांची-वाराणसी: पहले800से900रुपये,अब1100से1600रुपये तक
इन आंकड़ों से साफ है कि त्योहारों के दौरान कई रूटों पर यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर ज्यादा कीमत,काउंटर पर पुराने किराए का दावा
बस संचालकों का कहना है कि रांची से दूसरे राज्यों के लिए चलने वाली बसों के किराए में कुछ बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों को पुराने किराए पर भी टिकट उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, ऑनलाइन टिकट बुकिंग करने वाले यात्रियों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। दूसरी ओर, सिलीगुड़ी से यात्रा कर रांची पहुंचने वाले यात्रियों ने बताया कि पहले उन्हें स्लीपर बस में करीब 1000 रुपये में टिकट मिल जाता था, लेकिन इस बार उसी सफर के लिए 1400 रुपये देने पड़े। इससे त्योहार में घर आने-जाने का बजट बिगड़ रहा है।
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं,फिर क्यों महंगा हुआ सफर?
बस किराए में अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर त्योहार आते ही यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है? आमतौर पर डीजल की कीमतों, टोल टैक्स और परिचालन खर्च में वृद्धि को किराया बढ़ाने की वजह बताया जाता है। लेकिन मौजूदा स्थिति में इन खर्चों में किसी बड़ी बढ़ोतरी की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या त्योहारों में यात्रियों की बढ़ती मांग को आधार बनाकर बसों का किराया मनमाने तरीके से बढ़ाया जा रहा है?
परिवहन विभाग ने कार्रवाई का दिया भरोसा
त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए परिवहन विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। यात्रियों की मांग है कि बस किराए पर निगरानी रखी जाए और मनमानी वसूली पर रोक लगाई जाए। इस मामले पर परिवहन सचिव ने कहा कि राज्य में परिवहन निगम का गठन नहीं हुआ है और निगम की ओर से कोई बस संचालित नहीं की जाती है। हालांकि, अगर किसी यात्री की ओर से बढ़े हुए किराए को लेकर शिकायत की जाती है तो विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
त्योहार की खुशियों पर महंगे सफर का साया
दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार परिवार के साथ मनाने की चाहत हर किसी की होती है। खासकर दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर और नौकरीपेशा लोग पूरे साल इन त्योहारों का इंतजार करते हैं। लेकिन हवाई सफर के बाद अब बसों का किराया भी बढ़ने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब सवाल यह है कि क्या परिवहन विभाग त्योहारी सीजन में बसों के किराए पर प्रभावी निगरानी कर पाएगा? या फिर घर लौटने की मजबूरी में यात्रियों को बढ़ा हुआ किराया चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?
रांची से राहुल कुमार की रिपोर्ट
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