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CPI मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग लेकर 29 सितंबर से चलायेगी आंदोलन

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MADAN KISHORE JHAलेखक

पटना:भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा. शहीद ए आजम भगत सिंह की जयंती के मौके पर जनसंगठनों द्वारा आयोजित राजभवन मार्च भी प्रमुख मुद्दा रहेगा. साथ ही29सितंबर से02अक्टूबर तक पूरे बिहार विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे. हमारी मांग है ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाए. एसआईआर प्रक्रिया को रोका जाए. मतदाता सूचियों से गलत तरीके से बाहर किए गए सभी लोगों के मतदान अधिकार बहाल किए जाएं. निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल की जाए. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बदलकर ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित चयन समिति पर आधारित हो. इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों.

भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो द्वारा उठाए गए मुद्दे मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग के कामकाज के तरीके को लेकर कुछ बुनियादी सवाल खड़े करती है.

ये सवाल केवल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तक सीमित नहीं हैं. इनसे भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज और उसकी संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आती हैं. ये मुख्य चुनाव आयुक्त के पद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और इस पद की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है.

तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने कम से कम14मौकों पर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और नाम बहाल करने तथा एसआईआर के संचालन से संबंधित फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की है. उन्होंने अपनी सहमति के बिना लिए जा रहे फैसलों को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई हैं.

इन खुलासों से विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों द्वारा बार-बार उठाई गई चिंताओं की पुष्टि होती है और एसआईआर तथा मतदाता सूची के प्रबंधन को पारदर्शी और विकेंद्रीकृत बताए जाने के दावों की वास्तविकता सामने आती है. दोनों चुनाव आयुक्तों ने विशेष रूप से मतदाता डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण तथा राज्य और निर्वाचन क्षेत्र स्तर के वैधानिक अधिकारियों की उस तक पहुंच सीमित किए जाने पर सवाल उठाए हैं. इसके परिणाम केवल प्रशासनिक नहीं हैं. उदाहरण के लिएगोवा में सॉफ्टवेयर संबंधी प्रतिबंधों के कारण निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को97मतदाताओं को पात्र पाए जाने संबंधी अपने फैसले दर्ज करने से कथित तौर पर रोक दिया गया.

इसलिए मुद्दा केवल एसआईआर तक सीमित नहीं है. यह निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली तथा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांत की रक्षा से जुड़ा हुआ है. ऐसी कोई भी व्यवस्था, जिसमें मतदान का अधिकार अपारदर्शी और केंद्रीकृत नियंत्रण वाली प्रक्रियाओं पर निर्भर हो, चुनाव व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करती है.

निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता पहले कभी इतनी कमजोर नहीं रही. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को व्यवस्था में हेरफेर करने और संस्था के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. भाकपा अपनी सभी इकाइयों से29सितंबर से2अक्टूबर तक विरोध कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान करती है.

हम सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक नागरिक समाज संगठनों तथा लोकतंत्र के प्रति चिंतित नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हैं.

पटना से अंकिता की रिपोर्ट-

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