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शिक्षा विभाग का एक्शन

ACS केके पाठक के आदेश पर सरकारी स्कूल के 5 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं का नाम कटा..

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Arun Chourasiaलेखक

PATNA:-बिहार सरकार के सरकारी स्कूलों से अब तक 5 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं के नामांकन को रद्द कर दिया गया है.यह कार्रवाई शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के निर्देश के आलोक में की गई है.


शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार के के पाठक के आदेश के बाद से अब तक बिहार के पहली से 12 वीं तक के स्कूलों में कुल 5 लाख 39 हजार 466 छात्र-छात्राओं का नामांकन रद्द कर दिया गया है.इनमें पहली कक्षा के 31567, दूसरी कक्षा के 49214 छात्र, तीसरी कक्षा- 67294, चौथी कक्षा के 74394 पांचवी कक्षा- 72832, छठी कक्षा के 63667 सातवीं कक्षा- 60354, आठवीं कक्षा के 58563,नौवीं कक्षा के 4934, 11वीं के 3765 और 12 वीं के 2198 छात्र-छात्राओं का नाम काटा गया है.अब इन छात्र-छात्राओं को सरकारी स्कूल में दिए जा रहे छात्रवृति एवं पोशाक जैसी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पायेगा.


दरअसल शिक्षा विभाग को काफी संख्या में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं के स्कूल से अनुपस्थित रहने की शिकायत मिली थी,जिसके बाद शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव बनकर आये केके पाठक ने स्कूलों के निरीक्षण का अभियान शुरू किया,जिसमें अनुपस्थित या विलंब से आने वाले हजारों शिक्षकों पर कार्रवाई की.कई शिक्षकों का वेतन काटा गया तो कईयों से स्पष्टीकरण मांगा गया.उसके बाद छात्र-छात्राओं की उपस्थिति को ठीक करने के लिए निर्देश दिए गए.इसमें 15 दिन तक लगातार अनुपस्थित रहने वाले छात्र-छात्राओं का नाम स्कूल से काट देने का निर्देश दिया गया.इस निर्देश के आलोक में राज्य में 5 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं का नाम काटा गया है.

जिन छात्र-छात्राओं का नाम स्कूल से काटा गया है,उसमें अधिकांश छात्रा-छात्रा ऐसे हैं जिनका सरकारी और निजी स्कूल दोनो जगह नामांकन था.वे निजी स्कूल में पढ़ते थे और सरकारी स्कूल में महीने में एक दो दिन आकर हाजिरी बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते थे.इसके साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्रा दूसरे जगह रहते थे और गांव के सरकारी स्कूलों में नामांकन करवाये हुए थे.इन सभी छात्र-छात्राओं का नामांकन रद्द कर दिया गया है.अब निजी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा सरकारी स्कूल में मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं ले पायेंगे.निजी स्कूल में पढ़ने वाले जिन छात्र-छात्राओं का नाम सरकारी स्कूल में नामांकित रहता था.उसकी उपस्थिति बनाकर मध्याह्न भोजन योजना कै पेसों में गड़बड़ी की जाती थी.केके पाठक के इस अभियान से ये गड़बड़ी खुद पे खुद रोक लग गयी है.

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