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बीजेपी के मजबूत किले में सेंध!

बांकीपुर विधानसभा चुनाव के बाद पटना शिक्षक सीट पर हार से क्या संकेत ?

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MADAN KISHORE JHAलेखक

पटना : बिहार विधान परिषद चुनाव में पटना स्नातक हॉट सीट बनी थी जहां JDU के उम्मीदवार को तब पार्टी के विधायक अनंत सिंह ने जमानत जब्त कराने का ऐलान कर दिया था. यहां तो नीरज कुमार ने जीत दर्ज कर अपनी ताकत दिखा दी. लेकिन पटना के ही शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा चौंकाने वाला रहा. जहां RJD के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने BJP के डॉ. नवल किशोर यादव को हरा दिया. संजीव सिंह की जीत की चर्चा तो हुई. लेकिन नवल किशोर यादव की हार की भी खूब चर्चा हुई. जो इस सीट से पहली बार 1996 में MLC बने . यानी तीन दशक तक इस सीट पर उनका कब्जा रहा . नवल किशोर यादव ने राजनीति की शुरुआत लालू यादव के साथ की और बाद में बीजेपी में चले गये . लेकिन तीस साल बाद अब वे विधान परिषद में नहीं रहेंगे. बीजेपी विधान परिषद की एक ऐसी हार गई ... जहां वो काफी मजबूत स्थिति में थी . चुनाव में डॉ. संजीव कुमार सिंह को 4 हजार 487 वोट मिले. वहीं डॉ. नवल किशोर यादव को 3 हजार 439 वोट मिले.

तीन महीने में दूसरा बड़ा झटका

इस साल ये दूसरा मौका है जब बीजेपी को उस सीट पर हार झेलनी पड़ी है जो उसकी मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. पहला चुनाव था बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का.1995में पटना पश्चिम सीट पर नवीन किशोर सिन्हा जीते थे. जहां से वे लगातार चुनाव जीतते रहे और परिसीमन के बाद जब बांकीपुर सीट बनी तो2010से2025तक नितिन नवीन यहां जीत का झंडा गाड़ते रहे. लेकिन3अगस्त को जब उपचुनाव के नतीजे आये तब जीत का ये सिलसिला टूट गया . बिहार की सबसे ज्यादा शहरी आबादी और सबसे ज्यादा शिक्षित मतदाताओं वाली सीट पर हार बीजेपी के लिए झटका माना गया. बांकीपुर में बीजेपी की ना सिर्फ हार हुई . बल्कि पार्टी उम्मीदवार उतना वोट भी नहीं ला पाये जितने से2025में बीजेपी की जीत हुई थी. उपचुनाव में प्रशांत किशोर को64,151वोट मिले. वहीं बीजेपी के नीरज कुमार सिर्फ44,827वोट हासिल कर सके. वहीं2025के चुनाव का आंकड़ा देखें तो तब बीजेपी उम्मीदवार नितिन नवीन को98,299वोट मिले थे और आरजेडी की रेखा कुमारी को46,363वोट मिले थे .

दरक रहा बीजेपी का गढ़?

पटना की शहरी विधानसभा सीट बांकीपुर और विधान परिषद की शिक्षक सीट बीजेपी के लिए सुरक्षित मानी जाती रही है . लेकिन कुछ महीने के अंदर लगे दो बड़े झटके से माना जा रहा है कि यहां पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक कमजोर पड़ा है और ये सब कुछ तब हुआ है जब पटना के बांकीपुर से विधायक रहे नितिन नवीन बीजेपी के अध्यक्ष बने हैं और राज्य में पहली बार बीजेपी को मुख्यमंत्री का पद मिला है. पहले बांकीपुर और फिर पटना शिक्षक सीट का हाथ से निकलना बीजेपी नेतृत्व के लिए चिंता का सबब बन सकता है . बिहार में बीजेपी के लिए ये हार केवल दो चुनाव में हुआ नुकसान नहीं . बल्कि ये संकेत माना जा रहा है सिर्फ अतीत के भरोसे जीत हासिल नहीं की जा सकती और सियासी दुर्ग को दुरुस्त करना जरूरी है.

पटना से विवेक की रिपोर्ट-

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