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बिना ठोस कानूनी आदेश के किसी नागरिक का आशियाना उजाड़ना संविधान प्रावधानों का सीधा उल्लंघन -पटना हाईकोर्ट

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना ठोस कानूनी आदेश के किसी नागरिक का आशियाना उजाड़ना संविधान प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है. जस्टिस राज कुमार की अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि नवादा जिले के वीरेंद्र कुमार को तीन महीने के भीतर दो लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दिलाना सुनिश्चित करें.

इस मामले में नवादा जिले के राम नगर निवासी वीरेंद्र कुमार ने पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. याचिका के अनुसार, 13 जनवरी, 2016 को अंचल अधिकारी ने भारी पुलिस बल और नगर परिषद की जेसीबी के साथ मिलकर उनके एकमात्र आशियाने को जबरन ढहा दिया था.

ज़मीन के मालिकाना हक को लेकर पहले से ही सिविल कोर्ट में टाइटल सूट (टाइटल सूट नंबर 357/2014) लंबित था और डीसीएलआर के आदेश के खिलाफ अपील भी दायर की जा चुकी थी. इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी विधिवत डिमोलिशन ऑर्डर के घर को जमींदोज कर दिया.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘कब्जा दिलाने’ के आदेश का मतलब यह नहीं होता कि किसी के मकान पर बुलडोजर चला दिया जाए. डिमोलिशन के लिए अलग से स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन होना अनिवार्य है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि प्रशासन केवल ‘मूकदर्शक’था. जेसीबी और भारी पुलिस बल की मौजूदगी यह साबित करती है कि कार्रवाई प्रशासनिक सहभागिता से हुई.

हाईकोर्ट ने मुआवजे के आकलन और भुगतान की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के बजाय राज्य के मुख्य सचिव को सौंपी है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे. मुख्य सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि नुकसान का तकनीकी मूल्यांकन कराकर तय समय सीमा के भीतर शेष मुआवजे की राशि भी पीड़ित को भुगतान की जाए.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-

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