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पटना HC ने नालंदा डीएम का आदेश किया खारिज, दोनों पीडितों को 1-1 लाख मुआवजे का निर्देश

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट ने नालंदा जिला प्रशासन की ओर से बिहार अपराध नियंत्रण कानून,2024 के अंतर्गत मनमाने ढंग से नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतन्त्रता छीनने व प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग पर सख्त आदेश पारित किया है. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने नालंदा के तत्कालीन डीएम कुंदन के द्वारा पारित आदेश को निरस्त सिर्फ पूरी तरह से खारिज किया,जिसके तहत नालंदा के दो स्थानीय नागरिकों को आपराधिक तत्व बता कर उन पर कठोर पाबंदियां थोपी गई थी.

कोर्ट ने डीएम,नालंदा के आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को दोनों पीडितों को एक एक लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया और दस दस हजार रुपए मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया. कोर्ट ने ये धनराशि दोषी अधिकारियों से वसूलने का आदेश दिया.

कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला प्रशासन में न्यायिक सोच का अभाव है. खंडपीठ ने पाया कि डीएम के आदेश का प्रारूप पूरी तरह से कट एंड पेस्ट जैसा है,जिसमें बिना ठोस तथ्य,सामग्री और स्वतन्त्र जांच के आदेश पारित कर दिया गया है.

बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति को असामाजिक तत्त्व घोषित कर देना न्याय के सिद्धांत का खेला उल्लंघन है. नालंदा जिला के कटौती गांव में शशि कुमार उर्फ फूकन और अजय सिंह पर बिहार अपराध नियंत्रण कानून,2024 की धारा 3(3) के अंतर्गत कार्रवाई हुई.

प्रशासन का दावा था कि बिहार विधान सभा चुनाव और छठ पर्व में इनके स्वतंत्र रुप से घूमने पर विधि व्यवस्था व शांति भंग होने की आशंका है. सितंबर,2025 में उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया. लेकिन जिला प्रशासन ने उनके स्पष्टीकरण को नजरअंदाज कर उनके विरुद्ध बिहार अपराध नियंत्रण कानून,2024 के अंतर्गत कार्रवाई की.

एक महत्वपूर्ण विंदु को जिला प्रशासन ने नजरअंदाज किया. प्रावधानों के अनुसार अगर चौबीस माह में किसी व्यक्ति के विरुद्ध थाने में दो मामले दर्ज हो,तो उनके खिलाफ बिहार अपराध नियंत्रण कानून,2024 के अंतर्गत कार्रवाई हो सकती है. लेकिन इस मामले में ऐसा कोई मामला नहीं था. मनमाने ढंग से जिला प्रशासन द्वारा आदेश पारित किए जाने पर कोर्ट ने कड़ा आदेश पारित किया.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-

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