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बिहार की 11 सैटेलाइट टाउनशिप योजनाओं पर किसानों ने उठाए सवाल, बोले- जमीन, आजीविका और अधिकारों की कीमत पर विकास मंजूर नहीं

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Srishtyलेखक

पटना में किसान संगठनों ने बिहार की प्रस्तावित 11 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की जमीन और आजीविका की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा।किसान संगठनों के अनुसार पटना, दरभंगा, छपरा, सोनपुर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया, सीतामढ़ी, मुंगेर और सहरसा में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। संगठनों ने बड़े पैमाने पर कृषि भूमि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता, उचित मुआवजा, पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की मांग की।

लैंड पूलिंग व्यवस्था पर भी किसानों ने सवाल उठाते हुए पूछा कि जमीन के बदले मिलने वाली विकसित जमीन का मूल्यांकन किस आधार पर होगा। किसानों को किस स्थान और गुणवत्ता की जमीन मिलेगी तथा भविष्य में जमीन की कीमत बढ़ने पर उन्हें कितना लाभ मिलेगा, यह स्पष्ट करने की मांग की गई।संगठनों ने भूमि उपयोग के प्रस्तावित अनुपात पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार सड़क के लिए 22 प्रतिशत, बिक्री के लिए 15 प्रतिशत, पार्क और खेल मैदान समेत सुविधाओं के लिए 5 प्रतिशत, कमजोर वर्गों के आवास के लिए 3 प्रतिशत और भू-स्वामियों को वापस दी जाने वाली जमीन के लिए 55 प्रतिशत का प्रावधान बताया गया है।

किसानों ने हर परियोजना से पहले Social Impact Assessment और Social Audit कराने की मांग की। साथ ही बिहार सिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी में किसानों, स्थानीय जनता, निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों की भागीदारी की मांग रखी।किसान संगठनों ने कहा कि आधुनिक बिहार का मतलब केवल रियल एस्टेट विकास नहीं, बल्कि स्मार्ट गांव, सिंचाई, कृषि, ग्रामीण उद्योग और स्थानीय रोजगार भी होना चाहिए। मांगें नहीं मानी गईं तो नवंबर में पटना में किसान मार्च का ऐलान किया गया है।

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट

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