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डिग्री कॉलेज की मांग पर नवहट्टा में उग्र हुआ आंदोलन, हजारों छात्र-छात्राओं का मार्च, बाजार रहा बंद

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MADAN KISHORE JHAलेखक

सहरसा: जिले के नवहट्टा प्रखंड में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. शनिवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और डिग्री कॉलेज के संचालन को नवहट्टा मुख्यालय में शुरू करने की मांग को लेकर विशाल मार्च निकाला.

आंदोलन के समर्थन में नवहट्टा बाजार पूरी तरह बंद रहा. स्थानीय व्यापारियों ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन देते हुए अपनी दुकानें बंद रखी. उधर, डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर जारी अनशन का आज छठा दिन है और अनशनकारियों की बिगड़ती तबीयत ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है.

शनिवार को प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं नवहट्टा प्रखंड कार्यालय परिसर में जुटे. यहां से सभी ने एक विशाल मार्च निकाला, जो बस स्टैंड, थाना रोड समेत मुख्य बाजार क्षेत्र से होकर गुजरा. आंदोलनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों का कहना है कि नवहट्टा जैसे बड़े प्रखंड में डिग्री कॉलेज नहीं होने के कारण उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है. इससे समय, पैसा और पढ़ाई तीनों प्रभावित होते हैं. छात्र-छात्राओं ने मांग की कि डिग्री कॉलेज का संचालन नवहट्टा मुख्यालय में ही किया जाए ताकि स्थानीय युवाओं को बेहतर शैक्षणिक सुविधा मिल सके.

डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर चल रहा अनशन भी लगातार जारी है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि छह दिनों से जारी भूख हड़ताल के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल या आश्वासन नहीं मिला है. अनशन पर बैठे तीन लोगों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है,जिसके कारण आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. आंदोलन का समर्थन करने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग,सामाजिक संगठन और व्यापारी भी आगे आ रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

फिलहाल नवहट्टा में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है. छात्रों का आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है और अब सबकी निगाहें प्रशासन तथा सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं. अब देखना होगा कि वर्षों पुरानी इस मांग पर कब तक कोई ठोस फैसला लिया जाता है.

सहरसा से शशि मिश्रा की रिपोर्ट-

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