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पटना जू में 165 घड़ियाल, 14 वयस्क और 151 शावक; गंडक में छोड़ने की तैयारी, गैंडे और सफेद बाघ बने आकर्षण
वन्य प्राणी सप्ताह के मौके पर पटना जू की जैव विविधता एक बार फिर चर्चा में है। घड़ियालों की संख्या के मामले में पटना जू दुनिया के प्रमुख चिड़ियाघरों में खास पहचान रखता है। यहां वर्तमान में कुल 165 घड़ियाल हैं, जिनमें 14 वयस्क और 151 बच्चे शामिल हैं।वयस्क घड़ियालों में चार नर और 10 मादा हैं। वहीं, एक से चार वर्ष की उम्र के 151 शावक जू में मौजूद हैं। घड़ियालों के संरक्षण और संवर्धन में पटना जू की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इनमें से कई घड़ियालों को भविष्य में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ले जाकर गंडक नदी में छोड़े जाने की योजना है। इसका उद्देश्य नदी में घड़ियालों की प्राकृतिक आबादी को बढ़ाना है।घड़ियाल के अलावा पटना जू गैंडों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां कुल 10 गैंडे हैं, जिनमें छह नर और चार मादा हैं। इनमें आठ वयस्क और दो बच्चे हैं। जू में गैंडों की विभिन्न प्रजातियों से जुड़े जानवर भी मौजूद हैं।
बाघ भी पटना जू की खास पहचान हैं। पिछले 53 वर्षों में यहां 53 बाघ रह चुके हैं, जिनमें 36 का जन्म इसी जू में हुआ। वर्तमान में कुल 10 बाघ हैं। इनमें पांच सफेद और पांच पीले-भूरे धारीदार बाघ हैं। सफेद बाघ पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।जू में सीता और गीता नाम की दो सिंहनियां, चिंपांजी की जोड़ी, दो जोड़ी हिप्पोपोटामस और पांच जिराफ भी हैं। जिराफों में दो नर और तीन मादा शामिल हैं। इसके अलावा सफेद कृष्ण मृग, गौर समेत कई दुर्लभ वन्यजीव भी यहां मौजूद हैं।वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान इन जानवरों के संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
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