BIHAR NEWS
विश्वरंग 2026 में भारतीय संस्कृति की वैश्विक चेतना पर सार्थक विमर्श
‘विश्वरंग 2026’ के तहत 4 अक्टूबर को बिहार संग्रहालय, पटना में भारतीय संस्कृति, साहित्य, कला और दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की व्यापकता और उसकी वैश्विक अंतर्संबद्धता पर विचार-विमर्श हुआ।प्रख्यात चिंतक, लेखक एवं पूर्व राजनयिक पवन के. वर्मा ने ‘दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सांस्कृतिक चेतना’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत और दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच भाषा, साहित्य, दर्शन, कला और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से बने ऐतिहासिक संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।विमर्श के दौरान भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तकों का क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। विश्वरंग फाउंडेशन के चेयरमैन एवं डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली के कुलाध्यक्ष संतोष चौबे ने भविष्य में ऐसे प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने भारतीय भाषाओं के माध्यम से संस्कृति और ज्ञान परंपरा को व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर बल दिया।
प्रख्यात साहित्यकार, कवि एवं लेखक लीलाधर मंडलोई ने भारतीय साहित्य और कला की परंपरा तथा उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने साहित्य और कला को भारतीय सांस्कृतिक चेतना एवं सामाजिक संवेदना से जोड़ते हुए इसके विभिन्न आयामों पर चर्चा की।कार्यक्रम की शुरुआत ‘विश्वरंग फिल्म’ के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद 8वीं टैगोर राष्ट्रीय कला संगोष्ठी के अंतर्गत महान फिल्मकार सत्यजीत रे की चर्चित फिल्म ‘द इनर आई’ का प्रदर्शन किया गया। फिल्म के माध्यम से भारतीय कला-दृष्टि और रचनात्मकता के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, संस्कृतिकर्मियों और कला-प्रेमियों ने सहभागिता की। विश्वरंग 2026 का आयोजन भारतीय भाषाओं, साहित्य, कला और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक वैश्विक संवाद से जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
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