BIHAR NEWS
गोपालगंज में कचरे का बदला रूप, गीले कचरे से तैयार हो रही ‘गोपाली खाद’
बिहार के गोपालगंज जिले के सासामुसा, कुचायकोट के स्वच्छता पर्यवेक्षक मुन्ना कुमार यादव बताते हैं, “हमारे यहां प्रत्येक वार्ड में एक-एक कर्मी हैं, जो घर-घर जाकर कचरे का उठाव करते हैं। इस कचरे को अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (WPU) तक पहुंचाया जाता है। वहां दो कर्मी कचरे के सेग्रीगेशन का काम करते हैं। गीले कचरे से खाद बनाई जाती है, जबकि सूखे कचरे को बाहर बेचकर रीसाइक्लिंग के लिए भेज दिया जाता है। तैयार खाद का नाम हमारी पंचायत ने ‘गोपाली खाद’ रखा है, जिसे बाजार में 10 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता है।स्वच्छता किसी भी राज्य को स्वस्थ, सुंदर और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वच्छ बिहार के निर्माण में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वच्छता कर्मी, स्वच्छता पर्यवेक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधि अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इसी कड़ी में आज कहानी गोपालगंज जिले की है, जहां स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के तहत घरों से निकलने वाले गीले कचरे से जैविक खाद (कंपोस्ट) तैयार करने की पहल की गई है। घर से निकलने वाले कचरे से खाद बनाना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उपजाऊ मिट्टी तैयार करने की दिशा में एक उपयोगी पहल है।
हर वर्ष 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाता है। इस साल स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर गोपालगंज में “हमारे सफाई कर्मी, हमारे सुपरहीरो” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सफाई कर्मियों और स्वच्छता पर्यवेक्षकों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि वे अपने-अपने ग्राम पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में किस तरह योगदान दे रहे हैं। इस पहल के माध्यम से सफाई कर्मियों और स्वच्छता पर्यवेक्षकों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें अपनी बात रखने का मंच भी दिया गया। उनके महत्वपूर्ण योगदान को ‘सुपर हीरो’ के रूप में सेलिब्रेट किया गया।
कचरे से कमाई तक का सफर
हमारे यहां ग्राम पंचायत के सभी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जाता है। इसके बाद कचरे को WPU में लाकर उसका अलग-अलग पृथक्करण कर जैविक खाद तैयार की जाती है। तैयार जैविक खाद को हमारी पंचायत के किसानों को उचित मूल्य पर बेचा जाता है। इससे प्राप्त राशि से स्वच्छता कर्मियों के पेडल रिक्शा और ठेला रिक्शा की मरम्मत कराई जाती है, ताकि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का काम प्रतिदिन सुचारू रूप से संचालित हो सके। हमारे यहां स्वच्छता शुल्क की भी बेहतर तरीके से वसूली की जाती है। प्रत्येक घर से स्वच्छता शुल्क लिया जाता है। लोग समय पर शुल्क देते हैं, जिससे हम अपने काम को समय पर और बेहतर तरीके से करने में सक्षम होते हैं।
हमारे यहां 12 वार्ड हैं और सभी 12 वार्डों से कचरे का उठाव किया जाता है। इसमें गीला और सूखा, दोनों तरह का कचरा शामिल है। पंचायत में WPU सेंटर बनाया गया है। मैं वहां तैयार होने वाली ‘गोपाली खाद’ का इस्तेमाल कर ऑर्गेनिक खेती करता हूं। मैं खुद इस खाद का इस्तेमाल करके बैंगन, टमाटर और मिर्च की खेती करता हूं। अभी फसल भी अच्छी हुई है। ग्राम पंचायत के लोग भी यहां आकर खेती देखते हैं और मेरी तैयार खाद की बिक्री भी होती है।
इस पहल से गोपालगंज में कचरा अब केवल समस्या नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन बन रहा है। घरों से निकलने वाले गीले कचरे से तैयार ‘गोपाली खाद’ किसानों के लिए जैविक खेती का विकल्प बन रही है। खाद की बिक्री और स्वच्छता शुल्क से मिलने वाली राशि स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रही है। यह मॉडल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका—तीनों को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक सार्थक कदम है
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