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बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन का नया अध्याय

बरौनी रिफाइनरी-हिंदुस्तान उर्वरक से जुड़ेंगे, 2030 तक सालाना एक लाख मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य

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MADAN KISHORE JHAलेखक

पटना: बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य कैबिनेट ने बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के मसौदे को मंजूरी दे दी है. इस नीति का मकसद राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.

नई नीति के तहत वर्ष 2030 तक बिहार में हर साल एक लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही एक गीगावाट इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता विकसित करने की योजना है.

नीति के तहत बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन को ग्रीन हाइड्रोजन से जोड़ने की तैयारी है. उर्वरक और रिफाइनरी उद्योग में इसके इस्तेमाल के साथ भविष्य में भारी वाहन,बस,ट्रेन और समुद्री जहाजों में भी हाइड्रोजन ईंधन के इस्तेमाल की संभावनाएं हैं.

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहनों का प्रावधान किया है. जमीन और पानी उपलब्ध कराने में सहायता के साथ ग्रीन इंडस्ट्री के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे. इलेक्ट्रोलाइजर और भारी हाइड्रोजन वाहनों के निर्माण की पूंजीगत लागत में 10 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान है.

नीति के क्रियान्वयन के लिए फिलहाल ब्रेडा को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा. आगे इस क्षेत्र के लिए अलग निगम बनाने की योजना है.

बिहार में अभी तक सौर ऊर्जा पर मुख्य फोकस रहा है. ग्रीन हाइड्रोजन नीति के बाद स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश,उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-

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