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बिहार में एक करोड़ परिवार बनेंगे उद्यमी, ‘मेड इन बिहार’ को सरकारी खरीद में प्राथमिकता, रोजगार और उद्योग विस्तार पर सरकार का जोर
पटना: बिहार में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने2030तक राज्य के एक करोड़ परिवारों को उद्यमी परिवार बनाने का संकल्प दोहराया है. पटना के बापू सभागार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत चयनित लाभुकों के उन्मुखीकरण और प्रथम किस्त वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कई अहम घोषणाएं की.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में बनने वाले उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार के पर्चेस प्रेफरेंस एक्ट के तहत‘मेड इन बिहार’उत्पादों को सरकारी खरीद में25से40प्रतिशत तक हिस्सेदारी देने की व्यवस्था की गई है.
सरकार ने50करोड़ रुपये तक के टेंडर में भी स्थानीय उद्यमियों को फायदा देने का फैसला किया है. यदि कोई बिहारी उद्यमीL2, L3याL4पर है औरL1की दर पर काम करने को तैयार है,तो उसे काम दिए जाने का प्रावधान है.
कार्यक्रम में सात हजार से अधिक लाभुकों के खातों में पहली या अगली किस्त की राशि अंतरित की गई. सरकार करीब45हजार नए उद्यमियों को तैयार कर रही है. प्रत्येक उद्यमी को10लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है,जिसमें पांच लाख रुपये अनुदान और पांच लाख रुपये ऋण है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमिता के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और पलायन रोकने में मदद मिलेगी. सरकार का अनुमान है कि करीब44हजार उद्यमी यदि पांच-पांच लोगों को रोजगार देते हैं तो लगभग ढाई लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
कार्यक्रम में बिहारMSMEनीति-2026और मुख्यमंत्री क्लस्टर विकास योजना-2026का भी लोकार्पण किया गया. सरकार का जोर‘मेक इन बिहार’को नई पहचान देने और उद्योगों के जरिए समृद्ध बिहार बनाने पर है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
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