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बिहार में अब कम सजा वाले मुकदमों में भी चलेगा ट्रायल इन एब्सेंशिया, फरार अभियुक्तों के बिना होगी सुनवाई
पटना : बिहार में लंबित आपराधिक मुकदमों के निष्पादन में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब दस साल से कम सजा वाले मामलों में भी ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत सुनवाई की जा सकेगी. पहले इस व्यवस्था का इस्तेमाल मुख्य रूप से दस साल से अधिक सजा वाले गंभीर आपराधिक मामलों में किया जा रहा था. गृह विभाग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत इसका दायरा बढ़ाने को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है.
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन मुकदमों का तेजी से निपटारा करना है, जिनमें अभियुक्तों के फरार रहने या अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण सुनवाई लगातार टलती रहती है. ट्रायल इन एब्सेंशिया के तहत अदालत अभियुक्त की अनुपस्थिति में भी उसके खिलाफ जांच, सुनवाई और फैसला सुनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है.
90 दिन बाद शुरू होगी प्रक्रिया
विभागीय जानकारी के अनुसार, किसी अभियुक्त को भगोड़ा घोषित किए जाने या आरोप तय होने की तारीख से 90 दिन बाद ही ट्रायल इन एब्सेंशिया की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी. इसके पहले कम से कम 30-30 दिनों के अंतराल पर दो गिरफ्तारी वारंट जारी करना अनिवार्य होगा. यानी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही अनुपस्थिति में सुनवाई की जा सकेगी.
सरकार देगी कानूनी सहायता
इस व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि फरार अभियुक्त की ओर से सरकार अपने खर्च पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी. इसके अलावा मुकदमे के गवाहों के बयान मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से दर्ज कराने की भी अनुमति दी गई है.
बिहार में दिसंबर 2025 में इस व्यवस्था की शुरुआत हुई थी. अब इसका दायरा बढ़ने से कम सजा वाले मामलों में भी सुनवाई संभव होगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने में मदद मिलेगी.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
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