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बिहार की विरासत को नई पहचान देने की तैयारी

हेरिटेज सर्किट और यूनेस्को दर्जे पर जोर, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष ने लिखा पत्र

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MADAN KISHORE JHAलेखक

पटना:बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में पहल की जा रही है. जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने बिहार की विरासत के संरक्षण और पर्यटन विकास से जुड़े सुझावों को केंद्र के समक्ष रखने की पहल की है.

परिवहन,पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के बिहार दौरे के बाद समिति की वरिष्ठ सांसद और पद्मभूषण से सम्मानित सुधा मूर्ति ने राज्य की ऐतिहासिक,पुरातात्विक,धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए थे. इन्हीं सुझावों के आलोक में संजय झा ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर विचार करने का अनुरोध किया है.

प्रस्ताव में नालंदा और केसरिया में वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध पुरातात्विक अन्वेषण कराने के साथ केसरिया में विश्वस्तरीय पर्यटक सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया है.

वहीं बराबर की गुफाओं और वैशाली को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए पहल करने की बात कही गई है. इसके अलावा नालंदा,राजगीर,बोधगया,वैशाली,केसरिया,बराबर और विक्रमशिला जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर एकीकृत हेरिटेज सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव है.

इस सर्किट की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग के जरिए बिहार की विरासत को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने की दिशा में काम करने की बात कही गई है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--

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