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भाकपा-माले और खेग्रामस की जांच टीम बेहरावां, पुनपुन पहुंची, नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन
पटना: जिले के पुनपुन प्रखंड स्थित बेहरावां चकिया मुसहर बस्ती में पुलिस की बर्बर कार्रवाई की जांच करने के लिए भाकपा-माले और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की उच्चस्तरीय जांच टीम ने9अक्टूबर को घटनास्थल का दौरा किया और वीरचंद पटेल पथ स्थित एमएलए फ्लैट213में शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य एवं पटना जिला सचिव अमर सिंह, राष्ट्रीय सचिव गोपाल रविदास और राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने संबोधित किया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि बेहरावां मुसहर बस्ती में पुलिस की कार्रवाई ने गरीबों और वंचित समुदायों के प्रति पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.32महिलाओं समेत मुसहर समुदाय के39लोगों को जेल भेज दिया गया है. इनमें दूध पिलाने वाली माताएं और युवतियां भी शामिल हैं. पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है.
इस घटना के खिलाफ ऐपवा12अक्टूबर को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन करेगा एवं15अक्टूबर को पुनपुन में प्रतिवाद सभा का आयोजन किया जाएगा. एवं बिहार भर में भाकपा माले, खेग्रामस, एवं ऐपवा के बैनर तले प्रतिवाद किया जाएगा.
वक्ताओं ने बताया कि4अक्टूबर को सुबह करीब11बजे, जब महिलाएं जितिया पर्व का उपवास तोड़ रही थीं, उस समय सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने बस्ती में कार्रवाई शुरू की. इससे पहले2अक्टूबर की रात भी बेहरावां चकिया मुसहर टोली में पुलिस ने कार्रवाई की थी.
नेताओं ने कहा कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बर्बरता की सारी सीमाएं पार कर दीं. पुलिस से बचने के लिए कई लोग पुनपुन नदी में कूद गए. नदी के दोनों किनारों से पुलिसकर्मियों ने लोगों पर रोड़े फेंके. इस दौरान रामू मांझी और आकाश मांझी की नदी में डूबने से मौत हो गई. स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास से दर्जनों अन्य लोगों को डूबने से बचाया गया.
इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोनों मौतों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. महिलाओं और युवतियों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़ितों की शिकायतों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
सुरेंद्र महतो के परिवार के साथ मारपीट और रवि केवट की आत्महत्या का मामला
पिपरा थाना पुलिस की पूर्व की कार्रवाई का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, 12सितंबर को सुरेंद्र महतो को राजघाट नवादा में उनकी दुकान पर मछली बेचते समय पुलिस मारपीट कर थाने ले गई थी. पुलिस उनकी पत्नी और बेटी को भी पकड़कर ले गई और उनके साथ भी मारपीट की गई. आरोप है कि इस दौरान सुरेंद्र महतो का हाथ तोड़ दिया गया.
सुरेंद्र महतो की बेटी खुशबू, जो पहले पिपरा थाना में ग्रामीणपुलिस के रूप में काम कर चुकी थीं, जब अपने पिता, मां और बहन से मिलने पहुंचीं तो उनके साथ भी मारपीट की गई और अभद्र गालियां दी गईं. खुशबू ने पिपरा थानाध्यक्ष और दो अन्य सब-इंस्पेक्टरों के खिलाफ आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन उनके अनुसार कोई कार्रवाई नहीं हुई.
नेताओं ने आगे कहा कि पुलिस प्रताड़ना से परेशान परिवार के सदस्य रवि केवट ने26अक्टूबर को आत्महत्या कर ली. उन्होंने इस मामले में पीड़ित परिवार के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने की मांग की. नेताओं ने पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इलाके में शराब की आपूर्ति करने वाले गिरोह और थाना पुलिस के बीच कथित सांठगांठ की भी जांच होनी चाहिए.
नेताओं ने कहा कि मुसहर समुदाय की शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है. गरीबों और वंचितों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है.
9अक्टूबर को ही विधानपरिषद शशि यादव के नेतृत्व में भाकपा माले जांच दल की टीम ने बिहार के डीजीपी से मुलाकात किया एवं ज्ञापन सौंपा.
डीजीपी के समक्ष रखी गई चार प्रमुख मांगें
डीजीपी से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित मांगें रखीं—
पिपरा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार समेत कार्रवाई में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए.
रवि केवट की आत्महत्या के मामले की विस्तृत जांच कर पीड़ित परिवार द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो.
बेहरामा चकिया मुसहर बस्ती की घटना में पीड़ित महिलाओं, युवतियों और अन्य परिजनों द्वारा दिए गए आवेदनों के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए.
जेल में बंद सभी महिलाओं को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाए तथा32महिलाओं समेत गिरफ्तार सभी39लोगों की गिरफ्तारी की निष्पक्ष समीक्षा कर उनकी रिहाई सुनिश्चित की जाए.
भाकपा-माले और खेग्रामस नेताओं ने मांग की कि बेहरामा की घटना को केवल पुलिस कार्रवाई का मामला मानकर नहीं टाला जाए.
दो लोगों की मौत, महिलाओं के गंभीर आरोपों, सामूहिक गिरफ्तारी और रवि केवट की आत्महत्या के मामले की जवाबदेही तय की जाए.
पीड़ित परिवारों को न्याय मिले और मुसहर बस्ती के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
पटना से अंकिता की रिपोर्ट-
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