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बहुचर्चित नरसंहार मामले में पटना HC ने आजीवन सजा काट रहे 2 व्यक्तियों को किया बरी

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MADAN KISHORE JHAलेखक

Patna : पटना हाईकोर्ट ने1996के बहुचर्चित नरसंहार मामले में दो उम्रकैद की सजा पाये व्यक्तियों को सबूतों के अभाव और लचर जांच के कारण बरी कर दिया है. नागेंद्र यादव और बसंत यादव को बरी किया गया.

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा. अरवल (तत्कालीन जहानाबाद) के करपी थाना क्षेत्र के केयाळ आहर पर4लोगों की निर्मम हत्या हुई थी. पटना हाइकोर्ट ने1996के करपी थाना (तत्कालीन जहानाबाद, वर्तमान अरवल जिला) अंतर्गत केयाळ आहर नरसंहार मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है.

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष की खंडपीठ ने अपील स्वीकार करते हुए नागेंद्र यादव (उर्फ नागेंद्र सिंह) और बसंत यादव (उर्फ पप्पु यादव) को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है. निचली अदालत ने इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

अभियोजन पक्ष के अनुसार ये घटना8-9सितंबर,1996की रात करीब11बजे की है. केयाळ आहर के पास सिंचाई के लिए पानी रोकने को लेकर झोपड़ी में पहरा दे रहे लोगों पर30-40अज्ञात उग्रवादियों (मजदूर किसान संग्राम परिषद से जुड़े) ने हमला बोल दिया था. इस भयानक रात की घटना में चार लोगों (भारत सिंह, मंगेर सिंह, राम निवास सिंह और नवलेश सिंह) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि प्रमोद कुमार और अन्य घायल हो गए थे.

इस घटना के करीब19साल बाद कोर्ट में गवाहों द्वारा पहली बार आरोपियों की शिनाख्त (डॉक आइडेंटिफ़िकेशन) कराई गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने कानूनन कमजोर और अविश्वसनीय माना.

जांच एजेंसी की भारी लापरवाही का भी तथ्य सामने आया. इस मामले में न तो मुख्य जांच अधिकारी और न ही डॉक्टर की गवाही कराई गई, जिससे घायलों की इंजरी रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में ठीक से साबित नहीं हो सकी.

कोर्ट ने पाया कि मुख्य सूचनाकर्ता और गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास था तथा पुलिस ने निष्पक्ष व पेशेवर तरीके से जांच नहीं की. हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि किस तरह लचर और लापरवाह जांच के कारण इतने गंभीर मामले के दोषी कानून की गिरफ्त से छूट जाते हैं.

हाईकोर्ट ने गुजरात राज्य बनाम किशनभाई मामले के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बिहार के गृह विभाग, डीजीपी (DGP) और अभियोजन निदेशालय को कड़े निर्देश दिए हैं. डीजीपी, बिहार को एक तीन सदस्यीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कमेटी गठित कर लचर जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जाँच करने का निर्देश दिया गया है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी लापरवाहियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने और अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करने को कहा है.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-

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