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बिहार के 12000 छात्रों पर मंडराया खतरा

परीक्षा से हो सकते हैं वंचित, बड़ी वजह आई सामने

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ASHISH KUMARलेखक

पटना : खबर सामने आ रही है कि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातक (यूजी) सेमेस्टर वन सत्र 2023-27 के करीब 12 हजार छात्र-छात्राओं पर सेमेस्टर वन की परीक्षा से वंचित होने का खतरा मंडराने लगा है। यूनिवर्सिटी परीक्षा विभाग ने अब तक इन सभी छात्र -छात्राओं का रजिस्ट्रेशन नहीं किया है। बिना रजिस्ट्रेशन का परीक्षा नहीं हो सकती है।


एग्जामिनेशन कंट्रोलर प्रो. शिव परसन सिंह ने बताया कि 94 हजार छात्र-छात्राओं का एडमिट कार्ड तैयार हो रहा है। उन्होंने बताया कि सभी कालेजों को 13 जनवरी तक शेष छात्र -छात्राओं का रजिस्ट्रेशन का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि पंजीयन से वंचित विभिन्न कालेजों के 12 हजार छात्र-छात्राएं मिड टर्म परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे।


बता दें कि च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के 4 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय में एक लाख 6 हजार छात्र-छात्राओं का नामांकन किया गया है। सेमेस्टर वन की परीक्षा 18 से 23 जनवरी के बीच होगी। अभी तक वंचित विद्यार्थियों को पंजीयन कॉपी भी नहीं मिली है। पंजीयन कॉपी पर परीक्षार्थी का विवरण होता है।

बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के बाद बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में सत्र एक से 3 साल पीछे थे। कुलाधिपति सह राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सभी विश्वविद्यालयों में एक साथ सत्र संचालन हो। इसके लिए च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत स्नातक का 4 वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू किया था।

जिसके बाद वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय ने सबसे पहले नामांकन प्रक्रिया शुरू की। मिड टर्म परीक्षा भी नवंबर में आयोजित की। पंजीयन करने में विलंब के पीछे मेजर के साथ माइनर विषयों का चयन में तकनीक सूझबूझ था। जबकि विश्वविद्यालय ने सभी जिलों में कालेजों के साथ कार्यशाला आयोजित किया था। बावजूद कालेज छात्र -छात्राओं का पंजीयन सही समय पर कराने में कामयाब नहीं रहे।

मिलेगी राजभवन की फटकार

च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत समय परीक्षा नहीं कराने वाले विश्वविद्यालय को राजभवन की फटकार मिल सकती है। अभी तक बिहार के पटना, बिहार समेत आठ विश्वविद्यालयों ने मिड टर्म और सेमेस्टर वन की परीक्षा आयोजित की है। वहीं कुछ एक्सपर्ट ने बताया कि राजभवन की पिछली बैठक में भी राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को हर हाल में स्नातक की परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था।छात्र-छात्राओं को 4 वर्षों में 8 सेमेस्टर की परीक्षा देनी होगी। इसमें कुल 52 पेपर की परीक्षा होगी। सिलेबस 3 वर्ष की जगह भले 4 वर्ष का हो गया है, लेकिन डिग्री लेने में खास अंतर नहीं है।

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