PATNA-साल 1996, मुम्बई में भाजपा कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जाती है। पटना से इस बैठक में शामिल होने के लिए दो बड़े नेता पहुंचते हैं। मीटिंग खत्म होती है और उसके कुछ महिनों बाद जदयू उस समय की समता पार्टी का अटल—आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा के साथ गठबंधन हो जाता है। परिणाम स्वरूप बिहार की जिस पार्टी के पास विधान सभा में मात्र 6 विधायक थे, वह 1996 के लोक सभा चुनाव में 22 सीटें जीत जाती है।

उस साल भाजपा के 18 नेता चुनकर लोक सभा पहुंचते हैं। तब बिहार और झारखंड एक राज्य हुआ करता था और यहां कुल 54 लोक सभा सीट पर इलेक्शन हुआ था। आगे चलकर उस दो नेताओं में से एक नेता अटल सरकार में रक्षा मंत्री और दूसरा रेल मंत्री बनता है।

यह कहानी है बिहार के सबसे सफल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के कद्दावार नेता जॉर्ज फ़र्नान्डिस की। आप सोच रहे होंगे कि आज हम आपको यह पुरानी कहानी क्यों सुना रहे हैं। कारण हम बताते हैं सोशल मीडिया पर आरसीपी सिंह को लेकर एक फोटो पोस्ट की जा रही है। पहले दावा किया गया कि आरसीपी सिंह भाजपा में शामलि हो गए हैं। जब इस खबर को लेकर सुशील मोदी जैसे वरिष्ठ नेताओं की ओर से खंडन कर दिया गया कि यह खबर गलत है। अब लोगों की ओर से दूसरा सवाला पूछा जा रहा है।

सवाल है कि कोई कैसे भाजपा ज्वाइन किए बिना कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हो सकता है। हम यहां इस बात का दावा नहीं कर रहे हैं कि आरसीपी मीटिंग में थे या नहीं, लेकिन इतना तो सच है कि पहले भी भाजपा कार्यकारिणी में अन्य दलों के नेता भी शामिल होते रहे हैं।

जब BJP कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए थे समता पार्टी के नीतीश और जॉर्ज फ़र्नान्डिस

वरिष्ठ पत्रकार अशोक मिश्रा बताते हैं कि अटलजी जब 13 दिनों के लिए पीएम बने थे तब समता पार्टी अर्थात जदयू ने उनको अपना समर्थन नहीं दिया था, लेकिन 13 महीने की अटल सरकार में जदयू ने एनडीए को अपना समर्थन दिया था।

क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया में आरसीपी सिंह की एक तस्वीर वायरल हो रही है जो कि हैदराबाद में आयोजित भाजपा कार्यकारणी की बैठक का बताया जा रहा है। हलांकि तस्वीर मीटिंग की नहीं है बल्कि बाहर की है। भाजपा नेताओं की ओर से उनका जोरदार स्वागत किया गया है। वैसे संभव है कि हैदराबाद में आरसीपी किसी अन्य आयोजन में पहुंचे हो और इसी बीच अनायास भाजपा नेताओं से उनकी मुलाकात हो गई हो और उनका स्वागत किया गया हो। मगर इतना तो साफ है कि आने वाले दिनों में बहुत कुछ होने वाला है।

बताते चले कि इन दिनों राज्य सभा नहीं भेजे जाने के कारण आरसीपी सिंह जदयू से नाराज बताए जा रहे हैं। समय—समय पर उपेंद्र कुशवाहा सहित अन्य जदयू नेताओं की ओर से उन्हें अपमानित किया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही नीतीश के हनुमान कहे जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा था कि मेरा नाम है रामचंद्र। मैं किसी का हनुमान नहीं हूं।