रामगढ़: जिले में एक बार फिर अंधविश्वास के चक्कर में एक घर से तीन लोगों की जान चली गई. भदानी नगर ओपी क्षेत्र के पारगड़ा गांव में झाड़ फूंक के तेज बुखार होने पर तांत्रिक और ओझा-गुणी के चक्कर में आने पर दो भाइयों के साथ मां की जान चली गई. एक साथ तीन लोगों को तेज बुखार आना किसी मौसमी संक्रमण, वायरल फीवर या दूषित पानी से होने वाली बीमारी (जैसे टायफाइड या मलेरिया) का लक्षण हो सकता था,लेकिन परिवार ने विज्ञान और चिकित्सा के बजाय तांत्रिक का सहारा लिया. जिसके बाद एक के बाद एक तीनों की मौत हो गई.

जिन बच्चों को समय पर अस्पताल ले जाकर बचाया जा सकता था, उन्हें घरवालों ने तीन दिन तक तंत्र-मंत्र और झाड़ फूंक के सहारे ठीक करने की कोशिश करते रहे. इसका नतीजा बेहद दर्दनाक साबित हुई,दोनों भाईयों की हालत और खराब होती गई और जब वे बेहोश हो गए तो घरवालों ने आनन-फानन में उन्हें रामगढ़ सदर अस्पताल ले गए, लेकिन वे दोनों भाइयों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

दरअसल पारगड़ा गांव के रहने वाले शंकर बेदिया के घर में तीन चार दिन पहले बड़े बेटे 15 वर्षीय रामकिसुन,10 वर्षीय छोटे बेटे साहिल के साथ मां संगीता देवी को एक साथ तेज बुखार हुआ था. तीनों को एक साथ बुखार देखकर परिजनों को लगा कि कोई ऊपरी हवा का चक्कर है. परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय घर में ही एक तांत्रिक को बुलाकर तीन दिन तक ओझा गुणी करते रहे, घर में अगरबत्ती जलते रही तांत्रिक मंत्र पढ़ता रहा. इस बीच तीनों की तबियत सुधार होने के बजाय लगातार बिगड़ती रही, लेकिन किसी ने अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई.

दोनों भाइयों की हालत बेकाबू हो गई और वे बिहोश हो गए तो परिजनों ने दोनों भाइयों को लेकर रामगढ़ सदर अस्पताल ले गए. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इधर, मां संगीता की भी धड़कन कमजोर पड़ रही थी, जिन्हें फौरन गंभीर हालत में रांची रिम्स ले जाया गया है.जहां गुरुवार को उसकी भी मौत हो गई.

इस पूरे घटना की सबसे दुखद पहलू यह है कि पिता शंकर बेदिया आडिशा में है और रोजी रोटी के लिए वहां प्राइवेट नौकरी कर रहे,उन्हें अभी यह ठीक से पता भी नहीं होगा उनका हंसता खेलता परिवार उजड़ गया है.जिन बेटों को पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे , वे इस दुनिया में नहीं है.

इस घटना की जानकारी होने पर पतरातु प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज गुप्ता गांव पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिजनों को न सिर्फ ढांढस बंधाया बल्कि उन्हें सरकारी नियमों के मुताबिक मुआवजा दिलाने की भी बात कही. साथ ही एक साथ तीन लोगों की बीमारी को देखते हुए पीएचईडी विभाग की टीम ने भी गांव का दौरा किया और आस-पास के चापानल के पानी के नमूने लिए है,ताकि यह पता चल सके कि कही पानी दूषित तो नहीं है और संक्रमण की यह वजह तो नहीं है. फिलहाल इस घटना से गांव में मातम पसरा हुआ है.

ऐसी घटनाएं समाज के हर लोगो को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि स्वास्थ्य शिविरों और जागरूकता अभियानों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर गांवों के अंतिम छोर तक प्रभावी ढंग से कैसे पहुंचाया जाए,ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का अंधकार न देखना पड़े.