वैशाली में आंदोलन : प्रधानमंत्री और धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी,कुछ तख्तियों पर आपत्तिजनक स्लोगन का प्रयोग
वैशाली:छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ दिल्ली और पटना तक सीमित नहीं रहा है. इसकी गूंज अब छोटे शहरों और गांवों में भी सुनाई देने लगी है. वैशाली के लालगंज में छात्रों ने गली-मोहल्लों में मार्च निकालकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी की गई. कई स्थानीय नेता भी छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरे और पुतला दहन किया गया,लेकिन इस पूरे प्रदर्शन के बीच एक ऐसा दृश्य भी सामने आया जिसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
कुछ तख्तियों पर अभद्र और आपत्तिजनक स्लोगन लिखे दिखाई दिए.वहीं, कुछ बच्चे भी इन्हीं नारों को दोहराते और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते नजर आए.आंदोलन और विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं, लेकिन क्या विरोध की आवाज मर्यादा की सीमा लांघनी चाहिए? क्या बच्चों को ऐसे प्रदर्शनों में इस तरह शामिल करना उचित है? अभद्र और आपत्तिजनक स्लोगन के साथ प्रदर्शन करना लोकतंत्र के खिलाफ है.