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संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत, जीमूतवाहन की कथा से जुड़ा है जिऊतिया पर्व, जानें पूजा विधि और मान्यता
कशिश डेस्क: पटना
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है। इसे जिउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। माताएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।
जिऊतिया पर्व का महत्व
जिऊतिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू धर्म में सबसे कठिन पर्व में से एक माना जाता है। जितिया व्रत तीन दिनों तक चलता है और इसके नियम काफी कठिन माने जाते हैं। इस पर्व के दौरान माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाती हैं।
महिलाओं के लिए आस्था और परंपरा का पर्व जिऊतिया
जिऊतिया पर्व पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से संतान की रक्षा और उसके दीर्घायु होने की कामना पूरी होती है। व्रत के दौरान महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं और पूजा के बाद व्रत का पारण करती हैं।
जिऊतिया में जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व
जिऊतिया पर्व भगवान जीमूतवाहन की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि उन्होंने नाग की संतान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। इसी कारण यह व्रत संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना से रखा जाता है।
बिहार-झारखंड में जिऊतिया को लेकर खास उत्साह
जिऊतिया धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं से भी जुड़ा पर्व है। बिहार-झारखंड में इसे लेकर खास उत्साह रहता है। महिलाएं व्रत रखकर पूजा करती हैं और संतान की लंबी उम्र व परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
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