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पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

तालाक की याचिका को दी मंजूरी,पत्नी के लिए 71.66 लाख की स्थायी अलमोनी तय

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archana singhलेखक

BIHAR NEWS: पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है. एक जोड़े की विवाह विच्छेद (तलाक) की याचिका को मंजूरी दे दी है, जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत यह निर्णय सुनाया.

कोर्ट ने माना कि वर्षों से दोनों पक्षों के बीच लगातार तनाव,अलगाव और वैवाहिक संबंधों का पुनर्स्थापित न हो पाना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पति की आय और दोनों बच्चों के भरण-पोषण के खर्च का व्यापक मूल्यांकन करते हुए पत्नी के लिए 71.66 लाख रुपये की स्थायी अलमोनी (स्थायी भरण-पोषण) तय की है.

कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के दो प्रमुख न्यायिक दृष्टांतों—शोभा रानी बनाम मधुकर रेड्डी (1988) और समर घोष बनाम जया घोष (2007) का हवाला देते हुए मानसिक क्रूरता के कानूनी सिद्धांतों को रेखांकित किया.

हाईकोर्ट ने समर घोष बनाम जया घोष के उस सिद्धांत का विशेष रूप से उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि जब लगातार अलगाव की एक लंबी अवधि रही हो,तो यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वैवाहिक बंधन मरम्मत से परे हो चुका है. शादी सिर्फ एक कानूनी बंधन बनकर रह जाती है.

ऐसी स्थिति में इस बंधन को तोड़ने से इनकार करना विवाह की पवित्रता की रक्षा नहीं करता, बल्कि पक्षों की भावनाओं के प्रति अनादर दिखाता है। ऐसी स्थितियों में, यह मानसिक क्रूरता की ओर ले जा सकता है.

दोनों का विवाह वर्ष 2009 में हुआ था और वे अप्रैल 2019 से अलग रह रहे थे।पति द्वारा पत्नी पर लगाए गए व्यभिचार (अडल्ट्री) के आरोपों को ठोस साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने खारिज कर दिया.

पति की प्रति माह 3.70 लाख रुपये की आय (वार्षिक 44.40 लाख रुपये) तथा बच्चों एवं परिवार की वित्तीय आवश्यकताओं का संतुलन बनाते हुए कुल 71,66,000 रुपये की राशि तय की गई.

यह राशि दो समान किश्तों (35,83,000 रुपये प्रत्येक) में तीन और छह महीने के भीतर देनी होगी. अलमोनी की पूरी राशि के भुगतान के बाद दोनों पक्षों को एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी मुकदमों को वापस लेने का निर्देश दिया गया है.

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