DM ने लापरवाह अधिकारियों पर चलाया हंटर
मोकामा और पुनपुन के CO पर ठोंका जुर्माना, राजस्व कर्मचारी को किया सस्पेंड
पटना : खबर है पटना से जहां पटना DM डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने लोक शिकायत निवारण को लेकर लापरवाही बरतने के मामले में मोकामा और पुनपुन के CO पर जुर्माना ठोक दिया है। साथ ही उन्होंने राजस्व कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दरअसल पटना DM डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने शुक्रवार को कार्यालय-कक्ष में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत द्वितीय अपील में तथा बिहार सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली, 2019 के तहत प्रथम अपील में शिकायतों की सुनवाई की गयी और उसका निवारण किया गया। लोक शिकायत निवारण में शिथिलता, संवेदनहीनता एवं अरूचि प्रदर्शित करने के आरोप में तीन अधिकारियों तथा कर्मियों के विरूद्ध कार्रवाई की गयी। सम्पतचक में पदस्थापित तत्कालीन राजस्व कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। साथ ही अंचल अधिकारी मोकामा के विरूद्ध पाँच हजार रूपया तथा अंचल अधिकारी पुनपुन के विरूद्ध ढाई हजार रूपया का अर्थदंड लगाया गया।
डीएम डॉ. सिंह द्वारा आज लोक शिकायत एवं सेवा शिकायत के कुल 15 मामलों की सुनवाई की गई एवं समाधान किया गया। दरअसल अपीलार्थी विनोद कुमार, पिता स्व0 जामुन केवट, साकिन बैरिया, थाना गोपालपुर, जिला पटना द्वारा द्वितीय अपील में जिलाधिकारी के समक्ष परिवाद दायर किया गया था। परिवादी की शिकायत भूमि विवाद से संबंधित है। मौजा बैरिया, अंचल सम्पतचक में पूर्व से जमाबंदी कायम रहते हुए वर्ष 2017-18 में कुल खतियानी रकबा 56 डिसमिल का पुनः खतियानी रैयतों के वंशजों के नाम से दाखिल-खारिज कर दी गई थी।
सम्पतचक में पदस्थापित तत्कालीन राजस्व कर्मचारी राजीव रंजन (वर्तमान पदस्थापना दानापुर अंचल) द्वारा 28-28 डिसमिल का दो जमाबंदी कायम करने का प्रस्ताव दिया गया था। डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि प्रश्नगत खेसरा में जब 37.5 डिसमिल जमीन की जमाबंदी ही कायम थी तो राजस्व कर्मचारी द्वारा कैसे 56 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज का प्रस्ताव समर्पित किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में खेसरा के खतियानी रकबा से ज्यादा की भूमि की जमाबंदी कायम नहीं हो सकती है। तत्कालीन राजस्व कर्मचारी के द्वारा गलत प्रस्ताव समर्पित करने के कारण कुल खतियानी रकबा 56 डिसमिल का नये सिरे से दाखिल-खारिज कर जमाबंदी कायम करने के कारण प्रश्नगत खेसरा में कुल 93.5 डिसमिल की जमाबंदी कायम हो गई।
जिलाधिकारी ने इसपर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत आपत्तिजनक है। इससे परिवादी को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दोषी राजस्व कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निदेश दिया। साथ ही उन्होंने खतियानी रकबा से ज्यादा रकबा की भूमि की जमाबंदी कायम होने के कारण अंचल अधिकारी, सम्पतचक के जमाबंदी रद्दीकरण के प्रस्ताव को अधिकतम तीन माह के अंदर नियमानुसार निष्पादित करने का निदेश अपर समाहर्ता, पटना को दिया।
डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि ऐसा लगता है कि तत्कालीन राजस्व कर्मचारी एवं अंचल अधिकारी, सम्पतचक द्वारा बिना अंचल/हल्का कार्यालय में संधारित पंजी-2 का अवलोकन किए तथा बिना स्थलीय जाँच किए दाखिल-खारिज वाद से पुनः कुल खतियानी रकबा 56 डिसमिल का पुनः जमाबंदी कायम किया गया है। यह सर्वथा अनुचित है। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सदर को इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन देने को कहा। प्रतिवेदन के आधार पर एक ही खेसरा के दोहरी जमाबंदी का आरोप प्रमाणित होेने के कारण तत्कालीन राजस्व कर्मचारी एवं अंचलाधिकारी के विरूद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है।
एक अन्य मामले में अपीलार्थी सरिता देवी, पति कारू ताँती, ग्राम नौरंगा जलालपुर, अंचल मोकामा द्वारा परिवाद समर्पित किया गया था। उनकी शिकायत जमीन को कब्जा किए जाने के संबंध में थी। जिलाधिकारी ने सुनवाई में पाया कि लोक प्राधिकार अंचल अधिकारी, मोकामा द्वारा जमाबंदी रद्दीकरण प्रस्ताव/दाखिल-खारिज अपील वाद दायर करने में शिथिलता, स्वेच्छाचारिता एवं लापरवाही बरती जा रही है। इससे लोक शिकायत निवारण में अनावश्यक विलंब हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह खेद जनक है। लोक शिकायत निवारण में अरूचि एवं शिथिलता बरतने के आरोप में डीएम डॉ. सिंह ने अंचल अधिकारी, मोकामा के विरूद्ध 5000/- रुपये का अर्थदंड लगाते हुए निवारण में विलंब के लिए उन्हें 48 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होगा तो विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। डीएम डॉ. सिंह ने परिवादी के शिकायत के निवारण हेतु भूमि सुधार उप समाहर्ता, बाढ़ को सभी पक्षों को सुनकर मुखर आदेश पारित करने का निदेश दिया।
एक दूसरे मामले में अपीलार्थी विजय कुमार मिश्रा, ग्राम पुनपुन धर्मशाला, अंचल पुनपुन, अनुमंडल मसौढ़ी द्वारा पुनपुन धर्मशाला से अवैध गुमटी हटाने के संबंध में परिवाद दायर किया गया था। सुनवाई में डीएम डॉ. सिंह ने पाया कि लोक प्राधिकार अंचल अधिकारी, पुनपुन द्वारा लोक शिकायत निवारण में शिथिलता बरती गई है। पुनपुन धर्मशाला की जमीन पर अवैध रूप से बने अस्थायी गुमटियों को भी अंचल अधिकारी द्वारा हटाने में कोई रूचि नहीं ली जा रही है। इससे यात्रियों को भी असुविधा होती है। उनकी कार्यशैली के विरूद्ध प्रथम अपीलीय प्राधिकार-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा भी प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई एवं दंड अध्यारोपित करने की अनुशंसा की गई है। डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि लोक प्राधिकार अंचल अधिकारी, पुनपुन लोक शिकायतो के निवारण के प्रति गंभीर नहीं हैं। जिलाधिकारी द्वारा अंचल अधिकारी, पुनपुन के विरूद्ध 2,500/- रुपया का अर्थदंड लगाते हुए अवैध गुमटियों को हटाकर साक्ष्य के साथ सुनवाई की अगली तिथि 03 जून, 2023 को उपस्थित रहने का निदेश दिया।
डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि लोक शिकायतों एवं सेवा शिकायतों का ससमय तथा गुणवत्तापूर्ण निवारण अत्यावश्यक है। लोक प्राधिकारों को संवेदनशीलता एवं तत्परता प्रदर्शित करनी होगी। डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 एवं बिहार सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली, 2019 का सफल क्रियान्वयन प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
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