JHARKHAND NEWS
परिसीमन के विरोध में लोहरदगा में आदिवासी महारैली, सरना धर्म कोड लागू करने की मांग
सरना धर्म कोड लागू करने और परिसीमन के विरोध में लोहरदगा में निकली आदिवासी महारैली, 2027की जनगणना में अलग धार्मिक पहचान दर्ज करने की मांग को लेकर उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
लोहरदगा:झारखंड में सरना धर्म कोड लागू करने और आदिवासी समाज की अलग धार्मिक पहचान सुनिश्चित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। रविवार को लोहरदगा में आदिवासी छात्र संघ, केंद्रीय समिति रांची के नेतृत्व में विशाल आदिवासी महारैली का आयोजन किया गया। महारैली में झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान सरना धर्म कोड लागू करने, वर्ष2027 की जनगणना में अलग धार्मिक पहचान का विकल्प देने और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों का विरोध किया गया।
आदिवासियों की पहचान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं- चमरा लिंडा
महारैली को संबोधित करते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि आदिवासी समाज के अस्तित्व, अस्मिता, भाषा, संस्कृति और पारंपरिक धार्मिक पहचान के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदिवासियों की विशिष्ट पहचान को कमजोर करने की कोशिशों का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
महारैली में शामिल वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराएं, रीति-रिवाज, संस्कृति और प्रकृति आधारित जीवन दर्शन है। इसके बावजूद जनगणना में अलग धार्मिक पहचान का विकल्प नहीं मिलना चिंता का विषय है। वक्ताओं ने मांग की कि वर्ष 2027 की जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल किया जाए, ताकि देशभर के आदिवासी समुदाय के लोगों को अपनी वास्तविक धार्मिक पहचान दर्ज कराने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के अस्तित्व, अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।
परिसीमन में आदिवासी हितों की रक्षा की मांग
महारैली के दौरान परिसीमन के मुद्दे पर भी वक्ताओं ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही परिसीमन से संबंधित निर्णय लिए जाने चाहिए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। किसी भी निर्णय में आदिवासी समुदाय की पहचान और हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन,आंदोलन जारी रखने का ऐलान
महारैली के समापन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने लोहरदगा के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से वर्ष 2027 की जनगणना में सरना धर्म कोड लागू करने और परिसीमन की प्रक्रिया में आदिवासी समाज के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। इस महारैली में आदिवासी छात्र संघ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे।
लोहरदगा से अमित वर्मा की रिपोर्ट
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