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निरसा में अवैध कोयला खनन के दौरान ब्लास्टिंग से दहशत, स्कूल की दीवारों में दरार आने का आरोप; ग्रामीणों का हंगामा
खेजुरिया बस्ती में देर रात हुए धमाके से घरों में कंपन महसूस होने का दावा,ग्रामीणों ने कुमारधुबी ओपी में दिया आवेदन;दूसरे पक्ष ने मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ का लगाया आरोप
धनबाद(निरसा): निरसा विधानसभा क्षेत्र में कथित अवैध कोयला उत्खनन का मामला एक बार फिर सामने आया है। कुमारधुबी ओपी अंतर्गत जोगरात पंचायत के खेजुरिया बस्ती में रविवार देर रात कथित अवैध खनन स्थल पर जोरदार ब्लास्टिंग किए जाने से इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों का आरोप है कि धमाका इतना तेज था कि आसपास के घरों में कंपन महसूस किया गया। वहीं, खनन स्थल से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित सरकारी विद्यालय की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं। घटना के बाद ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया और सोमवार को कुमारधुबी ओपी पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित स्थल पर पहले तालाब निर्माण के लिए जेसीबी से खुदाई किए जाने की बात कही गई थी। बताया गया था कि यहां बाद में मत्स्य पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब इस स्थान पर कथित तौर पर अवैध कोयला उत्खनन शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि घनी आबादी के बीच इस तरह की गतिविधियां पहले से ही खतरा पैदा कर रही थीं। रविवार देर रात अचानक ब्लास्टिंग किए जाने से लोग दहशत में आ गए।
धमाके के बाद खनन स्थल पर पहुंचे ग्रामीण,हुआ हंगामा
ब्लास्टिंग की तेज आवाज सुनकर ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए और खनन स्थल की ओर पहुंच गए। वहां उन्होंने उत्खनन का काम बंद कराने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच हंगामे की स्थिति बन गई। ग्रामीणों के विरोध के बाद मौके पर मौजूद लोग वहां से चले गए। ग्रामीणों ने विशेष रूप से सरकारी विद्यालय और आसपास के घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आबादी के बीच इस तरह ब्लास्टिंग किया जाना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
घटना के विरोध में सोमवार सुबह दर्जनों ग्रामीण कुमारधुबी ओपी पहुंचे और पुलिस को लिखित आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने कथित अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने और ब्लास्टिंग की घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों के साथ पहुंचे पूर्व मुखिया रिंटू पाठक ने बताया कि उन्हें खेजुरिया बस्ती में ब्लास्टिंग किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर उत्खनन का विरोध किया और काम बंद कराने की मांग की। इस दौरान वहां हंगामा भी हुआ।
दूसरे पक्ष ने लगाया मारपीट और तोड़फोड़ का आरोप
वहीं, मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरे पक्ष का कहना है कि ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और वाहनों में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया। इस आरोप के बाद मामला और पेचीदा हो गया है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
छापेमारी के बावजूद अवैध खनन पर सवाल
गौरतलब है कि निरसा विधानसभा क्षेत्र में अवैध कोयला उत्खनन के खिलाफ सीआईएसएफ की छापेमारी, वाहनों की जब्ती और अवैध खनन मुहानों की भराई जैसी कार्रवाई पहले भी की जाती रही है। इसके बावजूद कुछ ही दिनों में कथित तौर पर दोबारा उत्खनन शुरू होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब खेजुरिया बस्ती की घटना ने प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और ब्लास्टिंग से सरकारी विद्यालय तथा आसपास के घरों को हुए कथित नुकसान की तकनीकी जांच कराई जाए। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस और संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं।
निरसा से दीपांकर की रिपोर्ट
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