प्रश्नपत्र में कश्मीर वाले सवाल पर होगी कार्रवाई
शिक्षा मंत्री ने DM को दिए जांच के आदेश
PATNA- स्कूल की परीक्षा में कश्मीर को लेकर पूछे गए प्रश्न पर शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पूरे मामले की जांच करवाई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी। चाहे वह किसी भी पद पर क्यों ना बैठा हो। उन्होंने कहा कि यह चूक है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक रैली के दौरान अपने भाषण में तक्षशिला को बिहार में बताया था। उनको बताना चाहिए कि कहां है तक्षशिला। उन्होंने कहा कि वह भी चूक थी और यह भी चूक है। इसलिए पूरे मामले की जांच के बाद कठोर कार्रवाई होगी।
कश्मीर को अलग देश बताने पर बोले हेडमास्टर, कहा— यह मानवीय भूल है, गलती से देश लिखा गया
बिहार के किशनगंज में कक्षा 7 के प्रश्न पत्र में जम्मू कश्मीर को एक अलग देश बताने पर बवाल शुरू हो गया है। प्रशन पत्र सामने आते ही विवाद शुरू होने लगे। इसके बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक SK दास ने कहा कि यह एक मानवीय भूल है। हमें सवाल पूछना था कि कश्मीर के लोगों को क्या कहा जाता है। गलती से इसमें कश्मीर देश के लोगों को क्या कहा जाता है लिखा गया। जिस तरह से मामले को तूल दिया जा रहा है सह सही नहीं है। हमारी कोई ऐसी भावना नहीं है। हम भी भारत के नागरिक हैं और कशमीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं।
बिहार के शिक्षा विभाग का नया कारनामा ! प्रश्न पत्र पर उठे सवाल :बिहार के सीमावर्ती किशनगंज जिले में शिक्षा विभाग का नया कारनामा उजागर हुआ है। दरअसल बिहार शिक्षा बोर्ड द्वारा सरकारी स्कूलों के लिए स्थापित कक्षा 7 के प्रश्न पत्र में दावा किया गया है कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक अलग देश है। छात्रों से परीक्षा में यह प्रश्न पूछा गया कि पांच देशों- चीन, नेपाल, इंग्लैंड, कश्मीर और भारत के लोगों को क्या कहा जाता है।
अब बिहार शिक्षा बोर्ड में सातवीं कक्षा की अर्द्धवार्षिकी परीक्षा में जिस तरह से सवाल पूछे गये है उससे विवाद खड़ा हो गया है। सवालों को गौर से पढ़े तो लिखा गया है कि 'What are the people of the following countries called ? One is done for you.'फिर जो ऑप्शन दिए गये है उसमें चीन, नेपाल इग्लैंड के साथ भारत को तो जिक्र किया ही गया है। लेकिन चौथे ऑप्शन के तौर पर कश्मीर का जिक्र किया गया है उस पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल इस मामले में बिहार शिक्षा बोर्ड की तरफ से किसी भी तरह की सफाई नहीं दी गयी है। लेकिन अब ये लापरवाही का मामला है या फिर जानबूझ कर इतनी बड़ी गलती की गयी ये फिलहाल सवाल बना हुआ है।
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