JHARKHAND NEWS
लालू यादव का करीबी और अभय तिवारी का एजेंट? JPSC परीक्षा में अभ्यर्थियों की मदद का गंभीर आरोप
झारखंड की बहुचर्चित JPSC परीक्षा में गड़बड़ी और धांधली के मामले की जांच अब और तेज हो गई है। इस मामले में लालू कुमार यादव नाम के आरोपी की भूमिका को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। फिलहाल फरार चल रहे आरोपी लालू कुमार यादव ने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसे विशेष अदालत ने खारिज कर दिया है। 21 सितंबर के अपने आदेश में अदालत ने CID की जांच का हवाला देते हुए बताया कि इस पूरे कांड के मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी ने लालू कुमार यादव को अपना 'एजेंट' बताया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, लालू के जरिए ही अभ्यर्थियों को 14वीं JPSC परीक्षा में कथित तौर पर अवैध रूप से मदद पहुंचाई गई थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि लालू कुमार यादव खुद तो 14वीं JPSC PT और FRO परीक्षा में सफल हुआ ही था, साथ ही उसके घर से दूसरे अभ्यर्थी की OMR उत्तरपुस्तिका की तीन कार्बन कॉपियां भी बरामद हुई हैं।इसके अलावा, तलाशी के दौरान मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी के हस्ताक्षर वाला 8 लाख रुपये का चेक और कई बैंकों के ब्लैंक चेक भी मिले हैं।CID को दोनों के बीच 1.40 लाख रुपये के UPI ट्रांजैक्शन के सुबूत भी मिले हैं, जो इनके बीच गहरे वित्तीय संबंधों की ओर इशारा करते हैं।
हालांकि, लालू कुमार यादव के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि वह न तो JPSC के कर्मचारी हैं और न ही TDPL के, और उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामान नहीं मिला है। उन्हें सिर्फ संदेह के आधार पर फंसाया गया है।
लेकिन अदालत ने केस डायरी और 'झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023' के प्रावधानों को देखते हुए कहा कि लालू की भूमिका महज एक संयोग नहीं है। प्रथम दृष्टया वह इस अवैध नेटवर्क की एक अहम कड़ी और लाभार्थी दोनों नजर आता है।अब CID की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि लालू कुमार यादव का यह नेटवर्क कितना बड़ा था, उसने कितने और अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया और इस पूरे खेल में मनी ट्रेल (Money Trail) कहां-कहां तक फैला हुआ है।
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