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झारखंड में ड्रग्स का फैलता जाल: ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद भी बेखौफ तस्कर

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Srishtyलेखक

झारखंड में मादक पदार्थों की तस्करी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी (NCB) लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ताबड़तोड़ गिरफ्तारी और मुकदमों के बाद भी इस नेटवर्क पर प्रभावी लगाम क्यों नहीं लग पा रही है?

पुलिस के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि राज्य में नशे का कारोबार किस तेजी से फैला है।

साफ है कि पिछले दो वर्षों में ड्रग्स तस्करी के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

तस्करी पर रोक लगाने के लिए सीआईडी स्तर पर राज्यस्तरीय 'एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स' का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य अवैध खेती और आपूर्ति नेटवर्क को ध्वस्त करना है। पुलिस और एनसीबी की संयुक्त कार्रवाई में पिछले तीन वर्षों के दौरान 412 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं, जिनमें गांजा, अफीम और डोडा की बड़ी खेप शामिल है।लेकिन इसके बावजूद, जानकारों का मानना है कि कार्रवाई ज्यादातर छोटे स्तर के कारोबारियों तक ही सीमित रह जाती है। सिंथेटिक ड्रग्स के साथ पकड़े गए कई आरोपी कुछ ही महीनों में जमानत पर बाहर आ जाते हैं और फिर से अपना पुराना धंधा शुरू कर देते हैं।

इस पूरे मामले पर झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि पुलिस इस अवैध धंधे को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


"झारखंड में नशे के धंधे को पूरी तरह बंद करने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसके लिए सीआईडी में एक अलग विंग बनाया गया है, जो लगातार अभियान चला रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की जांच के बाद अब नशे के खिलाफ हमारी कार्रवाई और अधिक तेज की जाएगी।"

"डीजीपी ने यह भी बताया कि झारखंड में अफीम की अवैध खेती को नष्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं और अब तक हजारों एकड़ में लगी फसल को नेस्तनाबूद किया जा चुका है।"

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