JHARKHAND NEWS
1880 से चली आ रही आस्था: रांची के JAP-1 में जीवंत होती गोरखा दुर्गा पूजा परंपरा
झारखंड की राजधानी रांची में दुर्गा पूजा के कई रंग देखने को मिलते हैं जहाँ की परंपरा देखकर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। बात हो रही है रांची के डोरंडा स्थित JAP-1 (झारखंड आर्म्ड पुलिस-1) परिसर की, जहाँ हर साल सजती है बेहद खास फूलपात्ती शोभा यात्रा! यह कोई आम उत्सव नहीं है, बल्कि 145 साल से भी अधिक पुरानी एक गौरवशाली परंपरा है! साल 1880 में शुरू हुई इस शक्ति उपासना को आज भी यहाँ तैनात गोरखा जवानों ने पूरी शिद्दत और अनुशासन के साथ जीवित रखा है। समय के साथ ब्रिगेड का स्वरूप बदला, लेकिन माँ दुर्गा के प्रति यह अटूट आस्था आज भी वैसी ही है.इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होती है 'फूलपात्ती शोभा यात्रा'।
शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि को पवित्र पत्तों, विभिन्न प्रकार के फूलों और गन्ने के पौधों के इस अनूठे समूह यानी 'फूलपात्ती' को पूरे विधि-विधान और शान के साथ पूजा स्थल पर लाया जाता है। इस दौरान गूंजते पारंपरिक बैंड-बाजे और झूमते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है.यहाँ की पूजा पद्धति भी बेहद खास है। यहाँ माँ दुर्गा की बड़ी मूर्तियों के बजाय कलश को ही देवी का मुख्य स्वरूप मानकर आराधना की जाती है। और सबसे रोमांचक पल तब आता है, जब महानवमी तक गोरखा जवान अपनी पारंपरिक खुकरी और आधुनिक हथियारों से माँ को शस्त्र सलामी देते हैं—यह नज़ारा वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है! "सैन्य अनुशासन, नेपाली संस्कृति की अनूठी छाप और झारखंड की आत्मीयता का यह संगम रांचीवासियों के लिए हमेशा से मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है।
झारखंड से संदीप यादव की रिपोर्ट
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