JHARKHAND NEWS
एक ही मामले में बार-बार कैद नहीं हो सकती: झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला
क्या एक ही बकाया रकम के लिए किसी पति को बार-बार जेल भेजा जा सकता है? झारखंड हाईकोर्ट ने इस पर बेहद कड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है! कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून पतियों को सजा देने के लिए है, लेकिन उसका दुरुपयोग नहीं किया जा सकता.मामला दुमका जिले का है। दशरथ सिंह की शादी 2017 में शंपू कुमारी से हुई थी और दोनों की एक बेटी भी है। विवाद बढ़ने पर पत्नी ने फैमिली कोर्ट में गुजारा भत्ता यानी मेंटेनेंस की गुहार लगाई। परिवार न्यायालय ने मार्च 2023 में आदेश दिया कि पति अपनी पत्नी को 5,000 रुपये और बेटी को 3,000 रुपये हर महीने देंगे। "लेकिन असली विवाद तब शुरू हुआ जब पति ने पैसे नहीं चुकाए। पत्नी की शिकायत पर अदालत ने बकाया वसूली के लिए कार्रवाई की। हैरानी की बात यह रही कि निचली अदालत ने एक ही मामले और एक ही बकाये के लिए पति को लगातार 23 बार, यानी 30-30 दिनों की जेल की सजा बढ़ा-बढ़ाकर दे दी! याचिकाकर्ता को एक दिन के लिए भी रिहा नहीं किया गया।
इस मामले के खिलाफ पति ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 15 अक्टूबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने इस पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
कोर्ट ने CrPC की धारा 125(3) का हवाला देते हुए साफ किया कि गुजारा भत्ता न देने पर हर एक अलग चूक के लिए अधिकतम एक महीने की कैद हो सकती है। लेकिन, एक ही चूक या एक ही बकाये के लिए बार-बार जेल में रखना कानूनन गलत है.हाईकोर्ट ने दुमका के प्रधान परिवार न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए दशरथ सिंह को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि जेल जाने से गुजारा भत्ता चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, लेकिन कानून प्रक्रिया का पालन सही तरीके से होना चाहिए।
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