JHARKHAND NEWS
स्कूल से दूर बच्चों की अब होगी घर-घर पहचान, झारखंड में 'डहर पोर्टल' और 'जीरो ड्रॉपआउट' की पहल
क्या कोई बच्चा ऐसा है, जो स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुँच पाया? या जिसने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी? झारखंड में अब इस सवाल का जवाब सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि एक ठोस समाधान है! झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने 'डहर पोर्टल' के जरिए एक ऐसी क्रांति की शुरुआत की है, जो राज्य के हर एक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लेती है। राज्य भर में स्कूल न जाने वाले बच्चों की पहचान करने और उनकी नामांकन ट्रैकिंग को मजबूत करने के लिए एक व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की गई है, ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे! राज्य कार्यक्रम प्रबंधक और इस अभियान की नोडल अधिकारी, बिनीता तिर्की ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पहल 3 से 18 वर्ष की आयु के उन बच्चों पर विशेष रूप से केंद्रित है, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा या जो ड्रापआउट (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले) बन चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया में बसावटों को स्कूलों से जोड़ना (मैपिंग), शिक्षकों को परिवारों की जिम्मेदारी सौंपना और कामगार स्थलों की पहचान करना शामिल है। मुख्य जिम्मेदारियों में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों द्वारा घर-घर जाकर सर्वे करना, BRP और CRP द्वारा कार्यस्थलों की जांच करना और डेटा जुटाकर ड्रापआउट बच्चों की सटीक पुष्टि करना शामिल है। इतना ही नहीं, इस सर्वे से मिलने वाला डेटा 'समग्र शिक्षा वार्षिक कार्य योजना और बजट 2026-27' को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका अंतिम और सबसे बड़ा लक्ष्य है—'जीरो ड्राप आउट हैबिटेशन' यानी एक ऐसा बसावट क्षेत्र जहाँ एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।स्कूल प्रशासन, जिला अधिकारियों और सहयोगी साझेदारों के समन्वित प्रयासों से जेईपीसी 'सभी के लिए शिक्षा' के सपने को हकीकत में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस महाअभियान की मुख्य समय-सीमाएं इस प्रकार है-
9 नवंबर 2026 तक: बसावट की मैपिंग और शिक्षकों की टैगिंग का कार्य पूरा किया जाना है
10 नवंबर 2026 से 10 जनवरी 2027 तक: परिवारों का घर-घर सर्वेक्षण किया जाएगा
यह सर्वे 20%, 40%, 60%, 80% और शत-प्रतिशत के तय माइलस्टोन के चरणों में पूरा होगा
और 10 जनवरी 2027 तक यह पूरा सर्वेक्षण कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाएगा
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