JHARKHAND NEWS
रिम्स के 184 मेडिकल छात्रों के जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों की जांच अटकी, जिलों से रिपोर्ट गायब
झारखंड के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स में इस साल एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले 184 नए विद्यार्थियों के आवासीय और जाति प्रमाण पत्रों की जांच फिलहाल अटक गई है।रिम्स प्रबंधन द्वारा संबंधित जिलों के उपायुक्तों (DC) को भेजे गए प्रमाण पत्रों की जिलावार सत्यापन रिपोर्ट, तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी अब तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। रिम्स की ओर से सभी जिला प्रशासनों से 10 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर यह जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का विशेष आग्रह किया गया था। लेकिन, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जिला स्तर से कोई अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) डॉ. शिशिर कुमार ने जानकारी दी है कि संस्थान ने बीते 16 सितंबर को ही सभी 184 विद्यार्थियों के जाति और स्थानीय आवासीय प्रमाण पत्रों की प्रतियां सत्यापन के लिए संबंधित जिलों के डीसी को भेज दी थीं।
आखिर इतनी जल्दबाजी और सख्ती क्यों बरती जा रही है? दरअसल, नीट (NEET) यूजी की थर्ड काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन सभी प्रमाण पत्रों की जांच रिपोर्ट तैयार कर 'झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद' (JCECEB) को सौंपी जानी है, ताकि काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों के इस भौतिक सत्यापन में यह कड़ाई पिछले सत्र में उजागर हुए फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले के बाद लागू की गई है।पिछले साल, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन लेने की शिकायत मिलने पर जब जांच बैठाई गई, तब वर्ष 2025 बैच के दो एमबीबीएस विद्यार्थियों और एक डेंटल (BDS) छात्रा के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। उपायुक्तों की आधिकारिक जांच में फर्जी प्रमाण पत्र की पुष्टि होने के बाद, रिम्स प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से उन तीनों विद्यार्थियों का नामांकन रद्द कर दिया था।
जाति और आवासीय प्रमाण पत्रों के इस भौतिक सत्यापन में यह कड़ाई पिछले सत्र में उजागर हुए फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले के बाद लागू की गई है।पिछले साल, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन लेने की शिकायत मिलने पर जब जांच बैठाई गई, तब वर्ष 2025 बैच के दो एमबीबीएस विद्यार्थियों और एक डेंटल (BDS) छात्रा के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। उपायुक्तों की आधिकारिक जांच में फर्जी प्रमाण पत्र की पुष्टि होने के बाद, रिम्स प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से उन तीनों विद्यार्थियों का नामांकन रद्द कर दिया था।
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