JHARKHAND NEWS
पलाश दीवाली मेला,ग्रामीण महिलाओं के हुनर को मिल रहा है नया बाजार और पहचान
ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार और JSLPS (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी) की एक अनूठी पहल ने इस दिवाली ग्रामीण महिलाओं की किस्मत और उनके कारोबार को एक नया आयाम दे दिया है। माननीय मंत्री जी के मार्गदर्शन और स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से राज्यभर में सजा है— 'पलाश दिवाली मेला'.कभी दूर-दराज के गांवों में रहकर जो महिलाएं बाजार की कमी और झिझक के कारण अपनी उद्यमी इच्छाशक्ति को रोक कर रखती थीं, आज वे जिला मुख्यालयों के प्रमुख स्थानों पर सजे इन पलाश स्टालों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़ी हैं। और लोग भी इन स्वदेशी उत्पादों पर अपना दिल हार बैठे हैं!
यहाँ चाक से बनी पारंपरिक गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां हैं,डिजाइनर दीये, मोमबत्तियां, पूजन सामग्री, मड़ुआ और तिल के स्वादिष्ट लड्डू, बांस कला से बने खूबसूरत एलईडी लैंप और सजावट का सामान, साथ ही कागज़ के बने फूल भी! यानी, एक आम नागरिक की दीवाली की हर ज़रूरत यहाँ पूरी हो रही है।इस पहल को ज़मीन पर उतारने में राज्य के सभी उपायुक्तों की अहम भूमिका रही है। सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, कोडरमा, चतरा और हजारीबाग में उपायुक्तों ने खुद मेला का उद्घाटन कर दीदियों का हौसला बढ़ाया है। वहीं, पश्चिमी सिंहभूम में माननीय मंत्री श्री दीपक बिरुआ जी ने खुद पहुंचकर दीदियों का उत्साहवर्धन किया।
नतीजा यह है कि इस दो दिवसीय मेले में 500 से अधिक उद्यमी दीदियां मिलकर—
6 लाख मिट्टी के दीये,
50 हजार जोड़ी गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां,
और 50 हजार डिजाइनर मोमबत्तियों के साथ पलाश गिफ्ट हैम्पर्स बेच रही हैं!
इस बार का लक्ष्य है— पूरे 1 करोड़ रुपये के व्यवसाय का! और उत्साह ऐसा है कि गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम के सभी प्रखंडों में इस मेले का विस्तार कर दिया गया है।"
JSLPS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महोदय ने सभी झारखंडवासियों से अपील की है कि इन स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पादों को अधिक से अधिक खरीदें, ताकि हमारी ग्रामीण महिलाओं के घरों में भी खुशियों की दीवाली मने।इतना ही नहीं दीवाली के बाद आ रहा है हमारा महान लोकपर्व 'छठ'। JSLPS की योजना है कि छठ के अवसर पर बांस के बने सूप और दौरा समेत सभी जरूरी सामग्रियां 'पलाश छठ स्पेशल बाजार' के जरिए सीधे आपके घर तक पहुँचाई जाएं।
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