JHARKHAND NEWS
ब्रजेश गंझू के निधन के बाद लूटूं और सोहावन में फीका रहा कर्मा पर्व
टीएसपीसी (TSPC) के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोगता की मौत के बाद लावालौंग क्षेत्र के लूटूं और सोहावन गांवों में गम और मातम का माहौल है। ब्रजेश गंझू की मौत के बाद इन गांवों में पारंपरिक पर्व 'करमा' की खुशियां पूरी तरह से मातम में बदल गईं.चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड के लूटूं और सोहावन गांव इन दिनों गहरी शोक की लहर में डूबे हैं। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के रामनगर में एटीएस (ATS) की कार्रवाई में टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से दोनों गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
हर साल हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने वाला करमा पर्व इस बार इन गांवों में नहीं मनाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले तीन दिनों से शोक में डूबे हैं। स्थिति ऐसी थी कि कई घरों में लगातार दो दिनों तक चूल्हा तक नहीं जला और ग्रामीणों ने भोजन तक नहीं किया।स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, भले ही ब्रजेश गंझू एक नक्सली संगठन के सुप्रीमो रहे हों, लेकिन गांव और प्रखंड स्तर पर कई लोग उन्हें एक बेहद साधारण और मददगार व्यक्ति के रूप में जानते थे। यही वजह है कि उनकी मौत से पूरा क्षेत्र आहत है और लोग इसे अपने इलाके के लिए एक बड़ी क्षति मान रहे हैं।
इस बीच, ब्रजेश गंझू की वृद्ध मां टुकनी देवी और उनकी पत्नी उषा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पत्नी उषा देवी ने आरोप लगाया है कि उनके पति को पुलिस ने पकड़ने के बाद मारा है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उषा देवी ने कहा है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वह चुप नहीं बैठेंगी और इसके लिए मानवाधिकार संस्थाओं तथा न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी।
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