JHARKHAND NEWS
बूढ़ी आंखों में पेंशन का इंतजार, झुर्रियों में छिपी बेबसी की कहानी, मुखिया से लगाई फरियाद
उम्र की ढलती शाम में जब इंसान को आराम और अपनों के सहारे की जरूरत होती है, उस वक्त पेटरवार प्रखंड के पिछरी उत्तरी पंचायत के दर्जनों बुजुर्ग अपनी ही पेंशन के लिए इंतजार की लंबी राह पर खड़े हैं. बूढ़ी आंखों में उम्मीद है, चेहरे पर झुर्रियां हैं और जुबां पर बस एक सवाल आखिर हमारी पेंशन कब मिलेगी?पेटरवार प्रखंड की पिछरी उत्तरी पंचायत के दर्जनों बुजुर्ग लाभुकों को पिछले छह-सात महीनों से पेंशन की राशि नहीं मिली है.पेंशन की छोटी-सी रकम ही इनके लिए दवा, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों का बड़ा सहारा है. लेकिन महीनों से भुगतान अटकने के कारण इनकी जिंदगी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.पेंशन के इंतजार में परेशान बुजुर्ग पंचायत की मुखिया कल्पना देवी के पास पहुंचे.किसी ने दवा की परेशानी बताई तो किसी ने राशन का संकट.किसी के चेहरे पर चिंता थी तो किसी की आंखों में व्यवस्था से एक आखिरी उम्मीद.लाभुकों का कहना है कि कई महीनों से पेंशन नहीं मिलने के कारण उन्हें दूसरों से मदद मांगनी पड़ रही है.
के इस पड़ाव पर जब शरीर साथ छोड़ने लगता है और दवाइयां जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं, तब पेंशन की राशि उनके लिए सिर्फ सरकारी सहायता नहीं, बल्कि जीवन का सहारा है.लाभुकों ने बताया कि भुगतान को लेकर जानकारी लेने पर राज्य स्तर पर तकनीकी अथवा प्रशासनिक त्रुटि के कारण राशि नहीं मिलने की बात कही जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि तकनीकी खामी का बोझ आखिर उन बूढ़े कंधों पर क्यों पड़े, जो पहले ही जिंदगी की तमाम परेशानियां झेल चुके हैं?मुखिया कल्पना देवी ने कहा कि बुजुर्ग, विधवा एवं दिव्यांग लाभुकों की पेंशन उनका अधिकार है.छह-सात महीने तक पेंशन का भुगतान नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है.उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से मामले का शीघ्र समाधान कर सभी लाभुकों की लंबित पेंशन राशि का भुगतान कराने की मांग की.फिलहाल उन बूढ़ी आंखों का इंतजार जारी है.चेहरे की झुर्रियां हर गुजरते महीने के साथ गहरी होती जा रही हैं, लेकिन उम्मीद अब भी बाकी है कि कभी तो उनके खाते में उनकी हक की पेंशन पहुंचेगी.
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