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जमशेदपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: रामगढ़ ठगी मामले में 5 आरोपी गिरफ्तार, 43 लाख का मामला

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Srishtyलेखक

झारखंड के जमशेदपुर से साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। रामगढ़ में हुए 43 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड की जांच करते हुए पुलिस ने जमशेदपुर के बिरसानगर इलाके में छापेमारी कर पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि ये आरोपी पिछले एक साल से एक किराए के मकान में छिपकर इस पूरे नेटवर्क को चला रहे थे, और आस-पड़ोस के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।मामले की शुरुआत रामगढ़ साइबर थाने में दर्ज 43 लाख रुपये की ठगी के एक मामले से हुई थी। तकनीकी जांच के दौरान जब पुलिस ने डिजिटल पदचिह्नों (Digital Footprints) को खंगाला, तो उनके तार सीधे जमशेदपुर के बिरसानगर तक जा पहुंचे।

इसके बाद रामगढ़ साइबर थाना, जमशेदपुर साइबर पुलिस और बिरसानगर थाना की एक संयुक्त टीम बनाई गई। इस ज्वाइंट टीम ने बिरसानगर के जोन नंबर स्थित ओम नगर के एक मकान पर अचानक दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, ये पांचों आरोपी इसी किराए के मकान में पिछले करीब एक साल से रह रहे थे। घर के अंदर बैठकर ये लोग शातिराना अंदाज में ठगी के इस बड़े खेल को अंजाम दे रहे थे। बाहर से देखने पर किसी को शक नहीं होता था कि इस आम से दिखने वाले घर के भीतर साइबर अपराध का कोई बड़ा सिंडिकेट चल रहा है।जांच में यह बात सामने आई है कि रामगढ़ में साइबर ठगी के जरिए करीब 43 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम एक खास बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने जब इसी संदिग्ध लेन-देन की कड़ियों को आपस में जोड़ा, तो वे सीधे इन आरोपियों के ठिकाने तक पहुंच गए।

फिलहाल, गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह खंगालने में जुटी है कि ठगी की यह रकम आगे किन-किन बैंक खातों में बांटी गई और इस पूरे नेटवर्क में किस आरोपी की क्या भूमिका थी।पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक छोटी सी कड़ी है। इस सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य लोग भी रडार पर हैं। इन पांचों आरोपियों से मिलने वाले अहम सुरागों और खुलासों के आधार पर पुलिस आने वाले दिनों में और भी ठिकानों पर छापेमारी कर सकती है।


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