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झारखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं, फिर भी 36 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में 32वें पायदान पर क्यों?

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Srishtyलेखक

झारखंड—प्रकृति, संस्कृति और धरोहरों से सजा एक ऐसा राज्य, जिसकी खूबसूरती देश-दुनिया को मंत्रमुग्ध कर सकती है। यहाँ झरने हैं, जंगल हैं, पहाड़ हैं और समृद्ध जनजातीय संस्कृति है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह अपार प्राकृतिक संपदा पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर पा रही है?हाल ही में जारी पर्यटन मंत्रालय के स्टेट टूरिज्म परफॉर्मेंस फ्रेमवर्क-2025 में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच झारखंड को 32वां स्थान मिला है। राज्य का स्कोर 4.385 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.116 है। यह आँकड़ा हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर हमारी कमियाँ कहाँ हैं। राहत की बात यह है कि घरेलू पर्यटन में शानदार उछाल आया है। साल 2024 में करीब 5 करोड़ 40 लाख घरेलू पर्यटक झारखंड आए—यानी पिछले साल के मुकाबले 51% की जबरदस्त बढ़ोतरी! लेकिन दूसरी ओर, विदेशी पर्यटकों की संख्या में 76% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है। चुनौतियाँ सिर्फ बड़ी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर की हैं। हुंडरू, दशम, जोन्हा, नेतरहाट और बेतला जैसे खूबसूरत स्थलों तक 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी', पार्किंग, साफ-सुथरे टॉयलेट, और दिव्यांग-फ्रेंडली सुविधाओं का अभाव आज भी पर्यटक अनुभव को प्रभावित करता है। इसके अलावा, जिला स्तर पर मजबूत टूरिज्म प्रमोशन काउंसिल और बेहतर प्रशासनिक तालमेल की भी जरूरत है। बावजूद इसके, उम्मीदें बहुत बड़ी हैं। राज्य का पर्यटन बजट 75 करोड़ रुपये है और जीएसडीपी में पर्यटन का योगदान 6% से अधिक है। जरूरत है देवघर-दुमका और रांची-पतरातू जैसे टूरिज्म सर्किट को और मजबूत करने की। अगर हम बुनियादी ढाँचा सुधार लें, तो झारखंड न सिर्फ पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ा सकता है, बल्कि स्थानीय युवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार के लाखों नए दरवाजे भी खोल सकता है।

झारखंड में पर्यटन की गाड़ी अब रफ्तार पकड़ने को तैयार है, बस जरूरत है पहियों को सही दिशा देने की!"


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