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छत कब ढह जाए, भरोसा नहीं! भगवान भरोसे चल रहा है स्कूल, 95 बच्चों पर एक अकेला शिक्षक

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Srishtyलेखक

"शिक्षा के मंदिर... जहां बच्चों का भविष्य गढ़ा जाता है, लेकिन झारखंड के पलामू जिले में ये मंदिर खुद अपने अस्तित्व की भीख मांग रहे हैं। पाटन प्रखंड के खैरदोहर न्यू प्राथमिक विद्यालय के मासूम बच्चे इन दिनों अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। साल 2004 में बना यह स्कूल भवन आज पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है और फर्श पूरी तरह क्षतिग्रस्त है।स्थिति इतनी डरावनी है कि स्कूल का छज्जा कभी भी गिर सकता है। साल 2002-03 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत शुरू हुए इस विद्यालय की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जर्जर दीवारों और टपकी हुई छतों के साए में पढ़ाई करने वाले इन बच्चों और उनके अभिभावकों के दिलों में हर पल एक ही डर बना रहता है—कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए .

मुश्किलें सिर्फ जर्जर भवन तक सीमित नहीं हैं। इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क का नामोनिशान तक नहीं है। बच्चे और शिक्षक रोज जान जोखिम में डालकर तंग पगडंडियों के सहारे स्कूल पहुंचते हैं। और ज़रा सोचिए, बारिश के दिनों में जब रास्ते कीचड़ से भर जाते होंगे, तो इन छोटे-छोटे बच्चों की मुसीबतें कितनी बढ़ जाती होंगी। इस स्कूल में कुल 95 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से रोज करीब 70 से 75 बच्चे पढ़ने आते हैं। लेकिन इन सबको संभालने वाला महज एक अकेला शिक्षक है! पढ़ाने से लेकर ऑफिस के तमाम कागजी काम तक, सब कुछ इसी एक शिक्षक के जिम्मे है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को कैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही होगी।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी, पत्राचार किया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? पलामू प्रशासन और शिक्षा विभाग से ग्रामीणों की साफ मांग है—नया भवन बने, पर्याप्त शिक्षक आएं और सड़क-शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द बहाल हों, ताकि इन मासूमों का भविष्य सुरक्षित रह सके।


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