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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,अब सिर्फ ग्रेजुएशन के आधार पर भी बन सकेंगे भाषा शिक्षक

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Srishtyलेखक

झारखंड के बीएड पास अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में अभ्यर्थियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि सरकार और आयोग अपने ही तय किए गए नियमों से पीछे नहीं हट सकते। पूरा मामला साल 2016 का है। झारखंड सरकार ने 17,786 हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला था। इसमें संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी जैसे विषय भी शामिल थे। योग्यता को लेकर असमंजस की स्थिति थी, जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जनवरी 2017 में आधिकारिक पत्र जारी कर पात्रता स्पष्ट की। इसके बाद जेएसएससी (JSSC) ने संशोधित विज्ञापन निकाला, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि संबंधित विषय में सिर्फ स्नातक (Graduation) और बीएड की डिग्री वाले अभ्यर्थी भी योग्य माने जाएंगे।

लेकिन बड़ा मोड़ तब आया जब परीक्षा पास करने और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद, 21 जून 2023 को अचानक इन अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी यह कहकर खारिज कर दी गई कि उनके पास पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) या आचार्य की डिग्री नहीं है। अभ्यर्थी न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे।

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार और JSSC को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब सरकार ने खुद नियमों के तहत स्नातक की योग्यता को मंजूरी दी थी, तो चयन प्रक्रिया के बीच में या बाद में पीजी की नई शर्त थोपकर उम्मीदवारी रद्द करना पूरी तरह गलत है। सरकार अपने ही फैसले से पीछे नहीं हट सकती।हाईकोर्ट ने उम्मीदवारी खारिज करने वाले उस नोटिस को पूरी तरह रद्द कर दिया है। साथ ही, राज्य सरकार और जेएसएससी को यह सख्त निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर सभी योग्य अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी स्वीकार कर उन्हें शिक्षक पद पर नियुक्ति दी जाए और सभी परिणामी लाभ भी प्रदान किए जाएं। इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है जो सिर्फ पीजी की डिग्री न होने की वजह से वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

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