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टीडीपीएल (TDPL) विवाद, आयोजित सभी 21 परीक्षाएं जांच के घेरे में, 462 नियुक्त अधिकारियों पर कसेगा शिकंजा

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Srishtyलेखक

झारखंड में जेपीएससी (JPSC) परीक्षाओं की साख पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कथित मेधा घोटाले की जांच का दायरा अब अप्रत्याशित रूप से काफी बढ़ गया है। सीआईडी (CID) की कार्रवाई अब सिर्फ कुछ परीक्षाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब दायरा बढ़कर कुल 21 परीक्षाओं तक पहुंच गया है! अब तक सीआईडी मुख्य तौर पर 14वीं जेपीएससी (JPSC), एसीएफ (ACF) और एफआरओ (FRO) परीक्षाओं की जांच कर रही थी। लेकिन अब फूड सेफ्टी ऑफिसर, सीडीपीओ (CDPO) और सिविल सेवा परीक्षा-2023 भी जांच के घेरे में आ गई हैं। इन तीनों परीक्षाओं के जरिए करीब 462 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, और अब सीआईडी इन नियुक्त अधिकारियों को भी समन भेजने की तैयारी में है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि 'मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड' (TDPL) के माध्यम से आयोजित जेपीएससी की सभी 21 परीक्षाएं अब शक के दायरे में हैं। सीआईडी ने इन परीक्षाओं के तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। पेपर लीक से लेकर ओएमआर (OMR) शीट में हेराफेरी और पैसों की सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को पास कराने के गंभीर आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है।

जांच के अगले चरण में झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा 2023, बैकलॉग परीक्षा, यूनिवर्सिटीज के गैर-शैक्षणिक पद, ड्रग इंस्पेक्टर, इंजीनियरिंग-मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर, सिविल जज, सहायक लोक अभियोजक और जेट (JET) परीक्षा 2024 के सफल अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की जाएगी।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीआईडी अब तक 27 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इनमें जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा, छात्र आंदोलन की फंडिंग और करोड़ों रुपये के लेनदेन को लेकर भी शिकायतें मिली हैं, जिनकी सुगबुगाहट तेज हो गई है।बहरहाल, एक के बाद एक परीक्षाओं के दायरे में आने से झारखंड के युवाओं और सफल अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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