JHARKHAND NEWS
जेवीएम श्यामली की माटी से निकला क्रिकेट का नया सूरमा
झारखंड की खेल राजधानी राँची ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट जगत को एक ऐसा नायाब हीरा दिया है, जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली के प्रांगण से निकलकर बाएँ हाथ के आक्रामक बल्लेबाज और स्पिन ऑलराउंडर शिखर मोहन ने घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन (रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों में लगातार शतक) का इनाम पाते हुए सीधे 'इंडिया-ए' क्रिकेट टीम में गरजते हुए एंट्री मारी है। शिखर मोहन 24 अक्टूबर से 10 नवंबर तक होने वाले न्यूजीलैंड दौरे के लिए 'इंडिया-ए' और न्यूजीलैंड-ए टीम के बीच खेली जाने वाली टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस धमाकेदार सफलता ने यह साबित कर दिया है कि जवाहर विद्या मंदिर श्यामली के मैदानों में सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई 'धोनी' तैयार करने की नर्सरी है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव रखने में जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली की खेल संस्कृति और अनुशासित माहौल का सबसे बड़ा हाथ रहा है। स्कूल के खेल मैदान ने ही शिखर मोहन को शुरुआती दौर में तकनीक, दबाव से निपटने के गुर और मैदान पर कभी न हार मानने वाली जिद्दी सीख दी थी। स्कूल की चारदीवारी के भीतर मिलने वाली बेहतरीन कोचिंग, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और पढ़ाई के साथ खेल के बीच संतुलन बिठाने के अनुशासन ने ही उन्हें आज इस मुकाम तक पहुँचाया है।इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर स्कूल के अंदर और बाहर जश्न का माहौल है। विद्यालय के प्राचार्य बी.एन. झा ने स्कूल के इस जांबाज छात्र की हुंकार पर मुहर लगाते हुए अपने तेवर में कहा कि हमारा शिखर मैदान पर कोई आम खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसी आंधी है जिसमें भारतीय क्रिकेट की तकदीर बदलने का पूरा माद्दा रखती है। जेवीएम श्यामली की खेल माटी और हमारे अनुशासित प्रशिक्षण ने ही उसे सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आसमान चीरने का हौसला दिया है।
वहीं, खिलाड़ी के इस आक्रामक तेवर और मैदान पर उसकी जिद की सराहना करते हुए स्कूल के वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक डॉ. मोती प्रसाद ने अपने चिर-परिचित जोशीले अंदाज में कहा कि शिखर मैदान पर उतरते ही किसी खूंखार शेर की तरह दहाड़ता है। उसके भीतर रनों की भूख और विकेट चटकाने की जो जिद है, उसे हमारे स्कूल के खेल के मैदान ने ही पाला-पोसा है। स्कूल के प्लेग्राउंड से शुरू हुआ यह खौफनाक सफर अब सीधे टीम इंडिया की जर्सी पर जाकर थमेगा। यह पूरी कामयाबी पूरी तरह से जेवीएम श्यामली की खेल संस्कृति और उस जिद की है जो एक साधारण छात्र को ग्लोबल स्टार बना देती है। शिखर मोहन का 'इंडिया-ए' टीम में यह धमाकेदार चयन इस बात की खुली चेतावनी है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय पटल पर श्यामली के इस लाल का बल्ला विरोधियों के होश उड़ाने और भारतीय सीनियर टेस्ट टीम में अपनी पक्की जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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