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जलकुंभी का साम्राज्य या आस्था की अनदेखी? छठ से पहले बदहाल हुआ सोलागिडीह तालाब

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Srishtyलेखक

आस्था का महापर्व छठ आने वाला है। ऐसे में छठ घाटों की साफ-सफाई और व्यवस्था को लेकर नगर निगम तैयारी करने का दावा कर रहा है। लेकिन चास के सोलागिडीह तालाब की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। तालाब में भारी मात्रा में जलकुंभी जमा है, जिससे छठ व्रतियों को इस बार काफी परेशानी हो सकती है। निगम की ओर से कुछ मजदूर लगाकर सफाई कराई जा रही है, लेकिन यह प्रयास नाकाफी नजर आ रहा है। तालाब की बदहाल स्थिति को लेकर पूर्व पार्षद भी नाराज हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर श्रद्धालु इस बार यहां छठ कैसे मनाएंगे? चास का सोलागिडीह तालाब शहर की लाइफलाइन माना जाता है। इस तालाब में बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ पूजा के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस बार तालाब की स्थिति बेहद खराब है। जलकुंभी से पूरा तालाब पटा हुआ है और कहीं भी पानी नजर नहीं आ रहा है।

यह स्थिति हाल के दिनों में नहीं बनी है, बल्कि लंबे समय से तालाब की यही हालत है। नगर निगम की ओर से कुछ मजदूरों को लगाकर सफाई जरूर कराई जा रही है, लेकिन तालाब की स्थिति को देखते हुए यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है।छठ पूजा का आयोजन करने वाले पूर्व पार्षद जयप्रकाश तापड़िया निगम की कार्यशैली से नाराज हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होने वाली है। निगम सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। बोकारो में बिना धरना दिए कोई काम नहीं होता। ऐसे में अब श्रद्धालुओं के साथ धरना देने पर ही उम्मीद टिकी हुई है। उन्होंने धरना देने पर विचार करने की बात कही है।

वहीं, चास नगर निगम की डिप्टी मेयर पूजा कुमारी का कहना है कि छठ व्रतियों को परेशानी न हो, इसके लिए बैठक की गई है और व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी चल रही है।चास नगर निगम के मेयर भोलू पासवान ने भी तालाब की स्थिति को खराब बताया है। उन्होंने कहा कि सफाई के लिए एक टीम बुलाई जा रही है और छठ से पहले पूरे तालाब की सफाई कराई जाएगी।

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