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झारखंड हाईकोर्ट का आदेश, दुमका के 20 साल पुराने सफाईकर्मियों की नियमितीकरण का रास्ता साफ

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Srishtyलेखक

झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका के सेटलमेंट ऑफिस में लंबे समय से काम कर रहे सफाई मोहिरों के नियमितीकरण के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है. जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने कहा कि नियमों के तहत फिलहाल नियमितीकरण नहीं हो सकता, लेकिन लंबे समय से लगातार काम लिए जाने के कारण राज्य सरकार को पद सृजित और स्वीकृत कर नियमितीकरण के दावे पर विचार करना होगा. फैसला 30 सितंबर 2026 को सुनाया गया.मामला डब्ल्यूपीएस संख्या 3754/2023 से जुड़ा है. दुमका के सेटलमेंट ऑफिस में सफाई मोहिर के रूप में काम कर रहे आठ लोगों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका कहना था कि वे लंबे समय से भूमि अभिलेख तैयार करने से जुड़े काम कर रहे हैं और वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है.

याचिकाकर्ताओं के अनुसार कुछ कर्मचारी 1992 से, जबकि अन्य 1997 और 2001 से काम कर रहे हैं. रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि वर्ष 2001 में लिखित परीक्षा के बाद 50 उम्मीदवारों का चयन किया गया था, जिनमें वर्तमान याचिकाकर्ताओं में से तीन शामिल थे. अदालत ने माना कि इनकी नियुक्तियां विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के बाद हुई थीं.राज्य सरकार की ओर से दलील दी गयी कि जिन पदों पर याचिकाकर्ता काम कर रहे हैं, वे स्वीकृत पद नहीं हैं. इसलिए 2015 की नियमितीकरण नियमावली और उसके संशोधित प्रावधानों के तहत उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता. सरकार ने यह भी बताया कि सफाई मोहिरों को निर्धारित सरकारी सर्कुलर के अनुसार पीस रेट के आधार पर भुगतान किया जाता है.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पदों का सृजन और उन्हें स्वीकृत करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसलिए अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह पदों के सृजन पर विचार करे और उसके बाद याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावे पर विचार करे. इसके लिए दुमका सेटलमेंट ऑफिस से उनके काम की निरंतरता और प्रकृति से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी.

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