इसरो का 59 साल का वैज्ञानिक बनना चाहता है MBBS
जमकर कर रहे हैं नीट की तैयारी
PATNA- आगर आपको कहा जाए कि एमएसी पास आउट एक इंजीनियर जिनकी उम्र 59 साल है जो पेशे से इसरो में रॉकेट वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं, वह अब एमबीबीएस डॉक्टर बनना चाहते हैं तो आपको भी आश्चर्य लगेगा। लेकिन यह सच है। एक 59 वर्षीय बंगाली वैज्ञानिक डॉक्टर बनने के लिए जमकर तैयारी कर रहे हैं। साल 2021 में भी उन्होंने नीट की परीक्षा दी थी लेकिन अधिक नंबर नहीं आने के कारण इस बार दोबारा परीक्षा देने जा रहे है।
उनका नाम राजन बाबू है। उनका जन्म 1963 में हुआ था। वह कहते हैं कि मेरा बेटा और बेटी पहले से ही एमबीबीएस के छात्र हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। मेरे पड़ोस के सभी बच्चे जब पढ़ने के लिए स्कूल जाते थे तब मैं अपने बीमार पिता, गृहिणी-माँ और बड़ी बहनों के साथ काम करता था। साल 1981 में मैंने दुरस्थ शिक्षा की मदद से मैट्रिक की परीक्षा पास की। मेरी मां ने मुझे बचपन में वर्णमाला और पहाड़ा पढ़ा सिखाया। मैंने सभी विषयों का अध्ययन अपने दम पर किया। मैं परीक्षा में शामिल हुआ और सफल रहा।
मैट्रिक परीक्षा के आधार पर मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स किया। टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजन बाबू ने 1992 में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (एएमआईई) परीक्षा को उत्तीर्ण किया। टेलीग्राफ विभाग में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में दो साल तक काम किया। पी एंड टी में काम करते हुए मैंने इसरो में आवेदन किया और मुझे शामिल कर लिया गया। उस समय केवल दो पद थे और मुझे बताया गया कि इसरो को लगभग एक लाख आवेदन मिले हैं। मुझे 1995 में चुना गया और मैंने रॉकेट वैज्ञानिक के रूप में पांच साल तक काम किया।
अपने इसरो कार्यकाल के दौरान, बाबू ने बिट्स पिलानी में एमएससी करना शुरू किया और 1999 में इसे पूरा किया। वह 2000 में अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने 2007 तक विभिन्न फर्मों में काम किया।
राजन बाबू कहते हैं कि 2019 में मेरे जीवन में एक बहुत बड़ा बदलाव हुआ। अपने बच्चों को एमबीबीएस करते देख डॉक्टर बनने का सपना मेरे मन में भी जाग उठा। राजन बाबू कहते हैं कि डाक्टर बनने के बाद मैं पैसा नहीं कमाना चाहता हूं। मैं लोगों की सेवा करना चाहता हूं। मैं दिखाना चाहता हूं कि कैसे कोरोना महामारी के दौरान लोग परेशान हो रहे थे। मेरी मां का निधन उसी महामारी के दौरान हुआ था। वह हॉस्पिटल पहुंचने से पहले एंबुलेंस में मर गई।
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