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हजारीबाग सीजीएम कोर्ट के आदेश पर एनटीपीसी और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग के अधिकारियों पर FIR दर्ज
मुआवजे की मांग करने पर महिला की ओबी (OB)से दबाकर हत्या का आरोप,एनटीपीसी और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग के अधिकारियों पर लगाया गया है
हजारीबाग: हजारीबाग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजीएम) न्यायालय के आदेश पर डाडी ओपी बड़कागांव पुलिस ने एनटीपीसी (NTPC) और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ कांड संख्या 182/2026 दर्ज कर लिया है। परिवादी की ओर से अधिवक्ता पवन कुमार यादव ने अदालत में पक्ष रखा, जिनकी बहस सुनने के बाद न्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने का यह आदेश जारी किया था । बड़कागांव स्थित जुगरा निवासी अरुण कुमार साव के आवेदन पर त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के पदाधिकारी उत्तम झा व चंचल सिंह तथा एनटीपीसी लिमिटेड के पदाधिकारी मुकेश कुमार, दीपक मोदी और प्रशांत सिंह को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है।
जमीन पर बिना मुआवजे डंपिंग का विरोध
परिवाद पत्र के अनुसार, यह घटना22फरवरी2026की दोपहर1:00बजे की है, जब परिवादी की30वर्षीय पत्नी प्रीति देवी जुगरा डंपिंग एरिया के पास बकरियां चरा रही थीं। परिवादी की जमीन पर बिना उचित मुआवजा दिए कंपनी के अधिकारी ओबी (Over Boulder) डंप करा रहे थे, जिसे देखकर प्रीति देवी ने विरोध किया और काम रोक दिया। काम रुकने पर त्रिवेणी सैनिक के अधिकारी उत्तम झा और चंचल सिंह सीआईएसएफ (C.I.S.F) व अन्य कर्मचारियों के साथ वहां पहुंचे और महिला से बहस करने लगे।
साजिश के तहत ओबी गिराकर हत्या का आरोप
उत्तम झा ने मौके पर कहा कि यह महिला मुआवजे को लेकर हमेशा परेशान करती है, इसका उपाय लगाना होगा। इसके बाद उसने अपने मोबाइल से एनटीपीसी के मुकेश कुमार को सूचना दी, जिसके बाद प्रशांत सिंह, मुकेश कुमार और दीपक मोदी ने फोन पर आदेश दिया कि इस महिला को ठिकाने लगाना पड़ेगा। उन्होंने वहां खड़ी मिट्टी लदी गाड़ी के चालक को बुलाकर महिला को ओबी (Over Boulder) से दफन करने का निर्देश दिया। अधिकारियों के निर्देशानुसार चालक ने अचानक प्रीति देवी के ऊपर मिट्टी से लदा ओबी गिरा दिया, जिससे गंभीर चोट लगने के कारण घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
दहशत फैलाने के लिए दिया गया घटना को अंजाम
परिवादी का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण और बिना उचित मुआवजे के डंपिंग का विरोध करने के कारण उक्त अधिकारियों ने पहले भी परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। भविष्य में कोई अन्य ग्रामीण इस डर से विरोध न करे, इसी खौफ को कायम करने के लिए इस हत्याकांड को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
प्रशासनिक मिलीभगत और जाली समझौते का खेल
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को माइंस में रखकर विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि बड़कागांव के अंचलाधिकारी (सी०ओ०) मनोज कुमार, पुलिस निरीक्षक ललित कुमार और ओ०पी० डीडीकला प्रभारी सेगेन मुर्मू ने कंपनी के कर्मचारियों के साथ मिलकर मामले को दबाने का प्रयास किया। परिवादी को धमकाया गया कि वह कंपनी का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा और प्रशासन ने एक जाली समझौता पत्र बनाकर उस पर हस्ताक्षर करवा लिए।
चेक देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश
इस जाली समझौते में तीन शर्तें रखी गई थीं, जिसमें मृतका की दो पुत्रियों को चार-चार लाख रुपये देने की बात थी, ताकि शव को उठवाकर जला दिया जाए और अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो। बाकी दो शर्तों का पालन नहीं किया गया और अब अधिकारियों द्वारा धमकाया जाता है कि इस मामले को भूल जाओ, वरना इसी तरह योजना बनाकर पूरे परिवार को जान से मार देंगे क्योंकि सारा प्रशासन उनका है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि और पुलिस की निष्क्रियता
मृत्यु-समीक्षा-रिपोर्ट (पोस्टमार्टम) के पारा संख्या 8 में भी यह स्पष्ट है कि मौत ओबी गिरने से आई गंभीर चोटों के कारण हुई है। इस घटना से तीन छोटे बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है। न्याय के लिए परिवादी ने 26 फरवरी 2026 को बड़कागांव थाना प्रभारी, 12 मार्च 2026 को पुलिस अधीक्षक (हजारीबाग) और 12 मार्च 2026 को ही पुलिस उप महानिरीक्षक (हजारीबाग) को लिखित एवं निबंधित डाक से सूचना दी। जब किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो थक-हारकर न्यायालय में भारतीय न्याय संहिता (B.N.S.) की धारा 61(2), 103, 318(2), 318(4), 335, 336(2), 336(3), 337, 338, 340(2), 339, और 3(5) के तहत अभियुक्तों को सम्मन करने और मुकदमा चलाने की गुहार लगाई गई है।
राहुल कुमार की रिपोर्ट
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