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हजारीबाग में 800 से अधिक दवा दुकानों की निगरानी पर उठे सवाल, सिविल सर्जन ने जांच के दिए आदेश
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में800से अधिक पंजीकृत दवा दुकानों के संचालन के बीच औषधि निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दवा दुकानों में लाइसेंस,आवश्यक दस्तावेजों,दवाओं के भंडारण और बिक्री संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। इस बीच सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने अवैध रूप से संचालित स्वास्थ्य संस्थानों और मेडिकल प्रतिष्ठानों की शिकायतों पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
दवा दुकानों की नियमित जांच जरूरी
दवाओं की बिक्री सीधे लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में प्रत्येक मेडिकल दुकान का वैध लाइसेंस होना,दवाओं का उचित भंडारण करना और बिक्री से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड रखना जरूरी है।
जिले में बड़ी संख्या में दवा दुकानें संचालित होने के कारण नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि दुकानों की जांच कितनी नियमितता से होती है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाती है।
अवैध मेडिकल प्रतिष्ठानों पर होगी कार्रवाई
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और इस संबंध में जांच के आदेश दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से दवाखाना या मेडिकल प्रतिष्ठान संचालित होने की सूचना मिलती है,तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
दवा दुकानों और स्वास्थ्य संस्थानों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना मरीजों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। नियमित निरीक्षण से बिना वैध लाइसेंस कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान करने,दवाओं के भंडारण में अनियमितताओं को रोकने और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने में मदद मिल सकती है।
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था प्रभावी होना जरूरी है,ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जा सके और आम लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध हों।
जांच के निष्कर्षों पर रहेगी नजर
सिविल सर्जन के निर्देश के बाद अब जांच और उसके निष्कर्षों पर नजर रहेगी। हालांकि, जिले की सभी 800 से अधिक दवा दुकानों में अनियमितता होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वास्तविक स्थिति का आकलन निरीक्षण और विभागीय जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा।
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